जामताड़ा के बाद अब बिहार बना 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर ठगों का नया हब? पढ़ें बचाव के तरीके
Bihar Cyber Crime: बिहार में 'डिजिटल अरेस्ट' और 'म्यूल अकाउंट' के जरिए करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय सिंडिकेट ...और पढ़ें

बिहार बना साइबर ठगों का नया हब (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
बिहार में 'डिजिटल अरेस्ट' सिंडिकेट सक्रिय, करोड़ों की ठगी।
पटना में 10 गिरफ्तार, फर्जी आधार-बैंक खातों का भंडाफोड़।
पुलिस ने जारी किए बचाव के दिशा-निर्देश, 1930 पर करें शिकायत।
डिजिटल डेस्क, पटना। साइबर ठगी () का नाम सामने आते से सबसे पहले लोगों का ध्यान झारखंड के जामताड़ा पर जाता है। लेकिन हाल ही में बिहार की राजधानी पटना समेत कई अन्य जिलों में एक के बाद एक हुए खुलासों ने साफ कर दिया है कि राज्य में 'डिजिटल अरेस्ट' और 'म्यूल अकाउंट' के जरिए करोड़ों रुपये की चपत लगाने वाला एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट सक्रिय है।
पटना में 10 शातिर गिरफ्तार, फर्जी आधार और बैंक अकाउंट्स का भंडाफोड़
पटना साइबर पुलिस ने हाल ही में अगमकुआं थाना क्षेत्र के शीतलानगर नहर रोड स्थित एक मकान में छापेमारी कर एक अंतरराज्यीय गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया।
यह सिंडिकेट फर्जी आवासीय प्रमाण पत्रों के जरिए लोगों के आधार कार्ड का पता बदलवाता था और उनके नाम पर बैंक खाते खोलकर साइबर ठगी के पैसों का लेन-देन करता था। पुलिस ने इनके पास से दर्जनों मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और पासबुक बरामद किए हैं।
मुजफ्फरपुर में 'डिजिटल अरेस्ट' गिरोह का पर्दाफाश
मुजफ्फरपुर साइबर पुलिस ने सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर डराने तथा 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लाखों रुपये ऐंठने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बरियारपुर क्षेत्र से आरोपी टीपू कुशवाहा को कुशवाहा को गिरफ्तार किया गया है।
किराए के खातों से करोड़ों की ठगी
पटना में ही पुलिस ने तीन ऐसे युवकों को गिरफ्तार किया जो गरीब या मध्यम वर्ग के लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे या उनके मौजूदा खातों को किराए पर ले लेते थे। इन्हीं खातों के जरिए साइबर ठगों ने लगभग ₹2.5 करोड़ की हेराफेरी की थी।
ठगी का तरीका
आरोपी खुद को सीबीआई या पुलिस अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और फिर गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ठगने का खेल शुरू करते हैं। यह सिंडिकेट किसी आम अपराधी की तरह काम नहीं करता, बल्कि ये साइकोलॉजी का इस्तेमाल करके शिकार को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेता है।
- नकली अधिकारियों का डर: ठग खुद को सीबीआई (CBI), कस्टम्स, ट्राई या पुलिस अधिकारी बताते हैं।
- पार्सल या केस में नाम: पीड़ित को डराया जाता है कि उनके नाम से भेजे गए पार्सल में ड्रग्स, फर्जी दस्तावेज या आपत्तिजनक सामान मिला है।
- कैमरे के सामने रहने की मजबूरी: पीड़ित को स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रखकर कमरे से बाहर न जाने, किसी से बात न करने और खुद को कैमरे के सामने रखने (डिजिटल अरेस्ट) के लिए मजबूर किया जाता है।
- अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराना: 'जांच' और केस से नाम हटाने के नाम पर पीड़ित के जीवन भर की कमाई को फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट्स) में ट्रांसफर करा लिया जाता है।
बिहार पुलिस ने आम नागरिकों के लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई शब्द नहीं: कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी कभी भी फोन/वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या नजरबंद नहीं कर सकती।
- अनजान नंबर से धमकी आए तो तुरंत कॉल काटें: यदि कोई व्यक्ति आपको किसी आपराधिक केस या पार्सल में नाम होने का डर दिखाए, तो घबराएं नहीं और तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएं।
- बैंक अकाउंट या OTP शेयर न करें: कभी भी किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी को अपना बैंक अकाउंट किराए पर दें।
- तत्काल 1930 पर कॉल करें: यदि आप या आपका कोई परिचित साइबर फ्रॉड का शिकार होता है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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