पटना, दिलीप ओझा। अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का प्रावधान तो है, लेकिन इससे जुड़े विभिन्न तरह के जटिल नियमों की वजह से सभी के हाथ यह नौकरी नहीं लगती है। डाक विभाग में भी यही हाल था। कुछ मामले तो 13 वर्षों से लटके पड़े थे। लेकिन अचानक विभाग मेहरबान हो गया। नियमों को इतना सरल कर दिया गया कि बिखरे सपने फिर संवर गए। बिहार भर में कुल 120 लोगों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया है। विभाग में उन्होंने अपना योगदान भी कर दिया है।

अनुकंपा नियुक्ति में ये थीं अडचनें

दरअसल अनुकंपा से जुड़े नियम समय-समय पर बदलते रहे। डाक विभाग के वैसे कर्मचारी जिनकी मृत्यु हो गई थी, उनकी आर्थिक स्थिति का आंकलन करने के लिए पैमाना बदलता रहा। पहले नॉन मैट्रिक को भी कुछ समय देकर जॉब दे दिया जाता था लेकिन बाद में इस पर रोक लग गई। पहले अंग्रेजी जरूरी नहीं था लेकिन बाद में इसे भी जरूरी कर दिया गया। विवाहित बेटी-बेटा को भी नौकरी मिलने में अड़चन थी। वर्ष 2010 में प्वाइंट सिस्टम विकसित किया गया। घर, जमीन, आय का श्रोत, बेटा-बेटी की संख्या, शिक्षा सहित इसमें आठ तरह का पैमाना रखा गया। सभी पर अंक निर्धारित किया गया था। सर्वाधिक अंक पाने पर ही अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल पाती थी। ऐसे ही प्रावधानों की वजह से अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने से अनेकों लोग वंचित रह गए थे।

बदला नियम, जगी किस्मत :

इस बीच डाक विभाग की ओर से वर्ष 2020 में नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया गया। पूर्व से चले आ रहे कई नियमों को शिथिल कर दिया गया। इससे कई तरह की अड़चनें दूर हो गईं। नये नियमों के तहत पैमाने का आधार निर्धनता, योग्यता और पात्रता को बनाया गया। नियम सरल होते ही उनकी भी किस्मत जग गई जो नौकरी मिलने के प्रति पूरी तरह से निराश हो चुके थे। कुल 120 ऐसे लोगों को नौकरी मिली है, जिनकी उम्मीदें टूट गईं थीं।

पूर्वी क्षेत्र, डाक विभाग, बिहार सर्कल के पीएमजी अनिल कुमार ने बताया कि बिहार में कुल 120 लोगों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र भेज दिया गया है। कुछ नियमों की वजह से ये लोग छूट गए थे। ऐसे नियमों को शिथिल कर इनकी नियुक्ति हुई है।

 

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