'जैसे घर संभालती हैं; वैसे ही जिम्मेदारी से संभालें थाना', महिला पुलिसकर्मियों को ADG की खास नसीहत
एडीजी के. सुहिता अनुपम ने महिला पुलिसकर्मियों से घर की तरह थाने के काम संभालने का आग्रह किया। उन्होंने महिला, ...और पढ़ें

'जैसे घर संभालती हैं; वैसे ही जिम्मेदारी से संभालें थाना', महिला पुलिसकर्मियों को ADG की खास नसीहत
HighLights
महिला पुलिसकर्मी घर जैसी जिम्मेदारी से थाने का काम संभालें।
महिला, बच्चों, ट्रांसजेंडर पीड़ितों से संवेदनशील व्यवहार करें।
पुलिस की छवि सुधारने को पीड़ितों से अच्छा बर्ताव जरूरी।
राज्य ब्यूरो, पटना। महिला पुलिसकर्मी जिस तरह अपने घरों को संभालती हैं, उसी जिम्मेदारी से थाना और इससे जुड़े कार्यों को भी संभालें। महिला और बच्चों के प्रति हिंसा से जुड़ी घटना होने पर तत्परता से कार्य करें।
पुलिस थानों में आने वाले पीड़िता खासकर महिलाएं, बच्चों एवं ट्रांसजेंडर से सभी स्तर के पुलिसकर्मी संवेदनशील एवं अच्छा व्यवहार करें।
पहली बार जब कोई पीड़ित थाना आता है, तो पुलिस से उसका पहला साक्षात्कार होता है। ऐसे में पीड़ितों के साथ अच्छा व्यवहार करने से पुलिस की छवि भी अच्छी बनती है और पीड़ित व्यक्ति अपनी बात भी पूरी तसल्ली से कह सकते हैं।
अपने काम में सख्त होना अच्छी बात है, लेकिन पीड़ितों के प्रति सख्त रवैया नहीं अपनाना चाहिए। ये बातें एडीजी (विधि-व्यवस्था सह कमजोर वर्ग) के सुहिता अनुपम ने पुलिस में लैंगिक संवेदनशीलता और जेंडर आधारिक मुद्दों पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कहीं।
पुलिस मुख्यालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सभी जिलों की महिला थानों की थानाध्यक्ष और प्रत्येक जिले से एक-एक महिला पदाधिकारी ने भाग लिया।
कार्यशाला को यूएनएफपीए (यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड) के स्टेट हेड शादत ख्वाजा नूर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच की अधिवक्ता अंचला गुप्ता, चाणक्या राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित जैन, कमजोर वर्ग प्रभाग की पुलिस अधीक्षक गरिमा गर्ग समेत अन्य ने भी संबोधित किया।
सत्रों के दौरान जेंडर से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका तथा मामलों के प्रति संवेदनशील एवं प्रभावी प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
यह भी पढ़ें- जब गोद में बच्चा और कंधे पर जिम्मेदारी थी, रोहतास में CM के कार्यक्रम में महिला सिपाही का अंदाज देख ठिठकीं नजरें
