सरकारी योजनाओं के लिए आधार काफी या वोटर ID भी जरूरी, ललन सिंह के बयान पर राहुल गांधी-अखिलेश यादव क्यों भड़के?
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के सरकारी योजनाओं के लिए आधार और वोटर आईडी को जोड़ने के बयान पर विवाद छिड़ ...और पढ़ें

राहुल गांधी बोले- गरीबों का हक छीनने की तैयारी
HighLights
ललन सिंह ने आधार-वोटर आईडी लिंक का सुझाव दिया।
राहुल गांधी ने इसे वोट चोरी की साजिश बताया।
अखिलेश यादव ने मिड-डे मील पर सवाल उठाए।
डिजिटल डेस्क, पटना। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब सिर्फ आधार कार्ड काफी होगा या वोटर आईडी भी दिखानी पड़ेगी? केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के एक बयान ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला इतना बढ़ा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी मैदान में उतर आए। राहुल गांधी ने इसे वोट चोरी की साजिश बताया तो अखिलेश यादव ने बच्चों के मिड-डे मील तक पर सवाल उठा दिए।
वहीं, ललन सिंह ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। आखिर ऐसा क्या कह दिया केंद्रीय मंत्री ने, जिस पर विपक्ष इतना हमलावर हो गया?
आधार कार्ड के बाद अब वोटर ID की एंट्री! क्या है पूरा मामला?
इस विवाद की शुरुआत केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के एक बयान से हुई। उन्होंने राष्ट्रीय जन योजना अभियान 2026-27 की कार्यशाला में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और भुगतान व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी। उनके बयान के मुताबिक, लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक जानकारी और वोटर आईडी (EPIC) नंबर को भी जोड़ा जाएगा।
ललन सिंह ने आधार कार्ड के जरिए होने वाले संभावित फर्जीवाड़े का जिक्र करते हुए वोटर आईडी के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड आसानी से बन जाने की वजह से लाभार्थियों की पहचान में गड़बड़ी की आशंका रहती है। इसी बयान को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
राहुल गांधी बोले- गरीबों का हक छीनने की तैयारी
ललन सिंह के बयान का वीडियो साझा करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इसे वोट चोरी की एक बड़ी साजिश करार दिया। राहुल गांधी का आरोप है कि वोटर लिस्ट से विपक्ष समर्थक लोगों के नाम चुन-चुनकर हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ वोटर आईडी से जोड़ दिया गया तो जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से कटेंगे, वे राशन, पेंशन, मनरेगा और आवास जैसी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो सकते हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि किसी गरीब की पेंशन उसके वोटर कार्ड की गुलाम क्यों होनी चाहिए?
अखिलेश यादव ने मिड-डे मील पर ही उठा दिया सवाल
इस विवाद में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की एंट्री ने मामला और दिलचस्प बना दिया। उन्होंने सरकार की इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वोटर आईडी जरूरी होगी तो स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील कैसे मिलेगा?
अखिलेश यादव का तर्क है कि बच्चे 18 साल से कम उम्र के होते हैं और उनका वोटर आईडी कार्ड नहीं बनता। ऐसे में क्या उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा? उन्होंने बीजेपी पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया और अपने कार्यकर्ताओं को वोटर लिस्ट को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी।
ललन सिंह का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले- तथ्यों को तोड़ने में माहिर
विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने भी चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने वीडियो बयान जारी कर राहुल गांधी पर निशाना साधा। ललन सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को तथ्यों को अपनी सुविधा के अनुसार तोड़-मरोड़कर पेश करने में पीएचडी हासिल है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को पूरी तरह हटाने की बात नहीं कही गई है। उनका कहना था कि लाभार्थियों की पहचान और भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए बायोमेट्रिक जानकारी और वोटर आईडी को जोड़े जाने की बात है।
राजीव गांधी के 15 रुपये वाले बयान की दिलाई याद
ललन सिंह ने इस राजनीतिक विवाद के बीच पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चर्चित बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने राजीव गांधी के उस कथन की याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि सरकार की ओर से भेजे गए 100 रुपये में से महज 15 रुपये ही आम लोगों तक पहुंचते हैं।
ललन सिंह ने दावा किया कि मोदी सरकार में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है।
आखिर गरीबों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए क्या दिखाना होगा?
इस पूरे विवाद के केंद्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, बायोमेट्रिक जानकारी और वोटर आईडी की वास्तविक भूमिका क्या होगी?
विपक्ष इसे गरीबों के अधिकार और वोटर लिस्ट से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार की ओर से इसे पारदर्शिता और फर्जी लाभार्थियों की पहचान से जुड़ा मामला बताया जा रहा है।
ऐसे में आम लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी मंत्री के बयान और सरकारी योजनाओं के लागू नियमों में अंतर होता है। वोटर आईडी को अनिवार्य करने संबंधी किसी आधिकारिक आदेश की पुष्टि के बिना यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब आधार कार्ड से योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
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