पटना, आनलाइन डेस्‍क। Bihar Assembly By-Election बिहार विधानसभा उपचुनाव की दो सीटों (तारापुर और कुशेश्वरस्थान) के लिए राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने पूरी ताकत झोंक दी है। इससे होकर भविष्‍य की राजनीति की राह निकलती दिख रही है। इस उपचुनाव के कारण ही कांग्रेस महागठबंधन (Mahagathbandhan) छोड़कर आरजेडी से अलग हो गई है। आरजेडी इस चुनाव में जीत दर्ज कर तेजस्‍वी यादव (Tejashwi Yadav) के नेतृत्‍व को मजबूती देने के साथ-साथ सत्ता का समीकरण अनुकूल बनाने की कोशिश में है। कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि व‍ह आरजेडी की पिछलग्गू नहीं है। अगर कांग्रेस जीतती है तो वह न केवल मजबूती के साथ महागठबंधन में लौट सकती है, बल्कि कन्‍हैया कुंमार (Kanhaiya Kumar) का कद भी बढ़ जाएगा। साधारण बहुमत से महज चार अधिक विधायकों वाले राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए भी यह चुनाव महत्‍वपूर्ण है। दोनों सीटों पर जेडीयू मैदान में है, इसलिए जीत से मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) का वजन बढ़ना तय है।

उपचुनाव से निकल रही भविष्य की राजनीतिक राह

तारापुर और कुशेश्वरस्थान की दो सीटों के लिए 30 अक्‍टूबर को होने जा रहे उपचुनाव में हार-जीत से सरकार की स्थिरता पर फिलहाल प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है, लेकिन इससे होकर भविष्य की राजनीतिक राह निकलती दिख रही है। इस कारण मैदान में कूदे सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इस उपचुनाव का महत्‍व इससे ही स्‍पष्‍ट है कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) भी छह साल बाद पहली बार प्रचार में उतरे। आरजेडी के तेजस्‍वी यादव जनसंपर्क में डटे रहे तो कांग्रेस के भी कन्‍हैया कुमार को मैदान में उतारा।

आरजेडी की जीत से बढ़ेगा तेजस्‍वी यादव का कद

आरजेडी के लिए यह उपचुनाव इसलिए महत्‍वपूर्ण हो जाता है कि इसमें उसके चेहरे तेजस्‍वी यादव की चमक की परीक्षा हो रही है। तेजस्‍वी ने उपचुनाव में प्रचार की कमान अपने हाथों में रखी। उन्‍होंने दोनों सीटों के लिए चुनावी सभाएं, रोड शो और अन्‍य तरीकों से जनसंपर्क किए। तेजस्‍वी को सहारा देने के लिए पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने छह साल बाद पहली बार मोर्चा संभाला। इस चुनाव में आरजेडी के परंपरागत मुस्लिम-यादव वोट समीकरण (MY Equation) की भी परीक्षा होनी तय है। खासकर तारापुर में, जहां सर्वाधिक 65 हजार यादव वोट हैं तो दूसरे स्‍थान पर 58 हजार कुशवाहा वोट हैं। यहां मुस्लिम वोट भी 22 हजार हैं। अगर आरजेडी चुनाव जीतता है, तब तेजस्‍वी काे परिवार में राजनीतिक उत्तराधिकार की लड़ाई में भी मजबूती मिलनी तय है।आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एवं तेजस्‍वी यादव ऐसे किसी पारिवारिक विवाद (Dispute in Lalu Family) से इनकार करते हैं, लेकिन तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के आए दिन के बयान कुछ और ही इशारा करते हैं।

कांग्रेस के लिए वजूद की लड़ाई है यह उपचुनाव

कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव इतना खास है कि इसके लिए उसने महागठबंधन छोड़ने तक का बड़ा फैसला कर लिया। कांग्रेस चाहती थी कि उसे उसकी परंपरागत कुशेश्‍वरस्‍थान की सीट मिले, लेकिन आरजेडी राजी नहीं हुआ। पिछले चुनाव में यहां कांग्रेस के प्रत्‍याशी अशोक राम केवल 7222 वोटों से हारे थे। कुशेश्‍वरस्‍थान में ब्राह्मणों वोट निर्णायक रहे हैं। यह उपचुनाव कांग्रेस के लिए वजूद की लड़ाई है। पार्टी यह संदेश देना भी चाह रही है कि वह आरजेडी की पिछलग्गू नहीं है। अगर कांग्रेस चुनाव जीत गई, तब वह मजबूती के साथ महागठबंधन में वापसी कर सकती है। इस जीत के साथ कांग्रेस के कन्‍हैया कुमार भी बिहार की राजनीति में स्‍थापित हो जाएंगे।

जीत से बढ़ेगी एनडीए सरकार की स्थिरता

सत्‍ताधारी एनडीए की बात करें तो 243 सदस्यीय विधानसभा में उसके 126 विधायक साधारण बहुमत से केवल चार अधिक हैं। ऐसे में अगर जेडीयू को जीत नहीं मिली तो उसपर विपक्ष का दबाव बढ़ जाएगा। एनडीए के अंदर भी मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर दबाव बढ़ेगा। संख्‍या की राजनीति में चार-चार विधायकों वाले जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) और मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) के राजनीतिक कद सरकार गिराने की हैसियत वाले हो जाएंगे। हां, अगर जेडीयू के विधायक जीते तो न केवल मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का जमीनी आधार एक बार फिर प्रमाणित होगा, बल्कि एनडीए सरकार की स्थिरता भी बढ़ेगी।

युवा राजनीति की दिशा भी तय करेगा उपचुनाव

यह उपचुनाव बिहार की युवा राजनीति की दिशा भी तय करती दिख ही है। आरजेडी के तेजस्वी यादव तथा कांग्रेस के कन्हैया कुमार के साथ लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान जैसे युवा नेताओं की राजनीतिक हैसियत की भी जांच हो जाएगी।

Edited By: Amit Alok