पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Crime News: बिहार सरकार के गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि वे बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) के तहत किसी भी अपराधी पर पहली बार में अधिकतम तीन माह के लिए ही निरुद्धादेश लगाएं। अगर ऐसी स्थिति बनती है कि किसी अपराधी पर इससे अधिक समय तक निरुद्धादेश लगाना जरूरी है और राज्य सरकार भी इसे जरूरी मानती है तो समय-समय पर इसे बढ़ाया जा सकता है। मगर हर बार अधिकतम तीन माह तक का ही आदेश दिया जाएगा। इसके अलावा जिलाधिकारियों को निरुद्धादेश पारित करते समय आदेश के विरुद्ध अपील के लिए सक्षम प्राधिकार का भी अनिवार्य रूप से जिक्र करने को कहा गया है। इस तरह के मामले में गृह विभाग आरक्षी शाखा के अवर सचिव को सक्षम प्राधिकार बनाया गया है।

  • एक बार में तीन माह तक ही सीसीए लगा सकेंगे डीएम
  • गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को लिखा पत्र
  • सक्षम प्राधिकार का भी अनिवार्य रूप से करना होगा उल्लेख

दरअसल, लोक शांति बनाए रखने व अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिलाधिकारियों द्वारा कुख्यात अपराधियों पर समय-समय पर निरुद्धादेश की कार्रवाई की जाती है। कई बार ऐसे मामले आए हैं, जिनमें निरुद्धादेश जारी तो किया गया मगर उसमें अवधि का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। इस तरह के आदेश परामर्शदातृ पर्षद द्वारा खारिज हो जाते हैं।

पंचायत चुनाव से पहले बढ़े सीसीए लगाने के मामले

हाल ही में एक डीएम के द्वारा 12 महीने का भी निरुद्धादेश लागू करने का मामला सामने आया था जिसके बाद भी गृह विभाग ने मार्गदर्शन के लिए पत्र जारी किया था। मालूम हो कि पंचायत चुनाव को देखते हुए जिलों में सीसीए लगाए जाने के मामले बढ़े हैं। गृह विभाग ने भी पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए कुख्यात अपराधियों पर सीसीए लगाने व उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने को कहा है।