पटना, जेएनएन। विस्मय हुआ...असहज भी। महिलाओं का आभूषण मैंने कभी नहीं पहना था। शहर की हृदयस्थली डाक बंगला चौराहे के पास स्थित हीरा पन्ना ज्वेलर्स के सीईओ शेखर केसरी ने जब मुझे अपने शोरूम की खास तकनीक 'ऑगमेंटेड रियलिटी' तकनीक से जोड़ा तो उनके मोबाइल स्क्रीन पर मेरा चेहरा तो उभरा ही, मेरे गले में चेन, कानों में इयर रिंग सज गया था। मैं अपने चेहरे को निहारने लगा, ठीक वैसे ही जैसे कोई सज-संवर कर आइना के सामने खड़ा होता है। सवाल किया, ऐसा कैसे संभव होता है? उन्होंने कहा कि 'ऑगमेंटेड रियलिटी' तकनीक इस शोरूम की खास तकनीक है। इससे ज्वैलरी टूल्स को जोड़ दिया गया है। आप घर पर रहिये, जो आभूषण लेना चाहते हैं, वही आभूषण आपके शरीर पर यह तकनीक सजा देती है। पसंद कीजिए, और होम डिलीवरी के जरिए ज्वैलरी आपके घर पहुंच जाएगी। कोरोना काल इस तकनीक पर ग्राहकों ने भरपूर भरोसा जताया और कारोबार की रौनक लौटने लगी। अब संतोषजनक कारोबार हो रहा है। त्योहारों से भी अच्छी उम्मीद है।

लॉकडाउन का व्यापक असर

शेखर केसरी ने कहा, लॉकडाउन 'सडेन सरप्राइज' था। स्टोर बंद। ऑनलाइन बंद। मांग खत्म। ऐसी स्थितियों के कारण कारोबार शून्य हो गया था। अच्छा संयोग यह कि मेरे सभी स्टॉफ, मैं, मेरा परिवार कोरोना संक्रमण की चपेट में नहीं आए।

उठा शटर तो ग्राहकों ने जताया भरोसा

अनलॉक प्रथम में छूट मिलने के बाद शटर उठा। शोरूम में डब्ल्यूएचओ, भारत सरकार की ओर से निर्धारित सभी सुरक्षात्मक उपाय किए गए। जूतों के सैनिटाइजर ट्रे, हैंड सैनिटाइजर, मास्क, ग्लव्स का उपयोग अनिवार्य किया गया। सभी फर्नीचर सैनिटाइज किए गए। हर ग्राहक के शोरूम से जाने के बाद बार-बार कुर्सियों को सैनिटाइज करना भी अनिवार्य बनाया गया। साथ ही नई तकनीक 'ऑगमेंटेड रियलिटी' का उपयोग शुरू हुआ। इस हैरान करने वाली अविस्मरणीय तकनीक से भी ग्राहक प्रभावित हुए। अन्य डिजिटल टूल्स का भी उपयोग शुरू किया गया। वेब एप की सुविधा ग्राहकों को दी गई। सप्लाई चेन में कुछ दिक्कत थी, इसे सुचारू किया गया जिससे ग्राहकों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा, इन उपायों से ग्राहकों का भरोसा बढ़ा, उन्होंने भरपूर सहयोग किया, और शून्य से बढ़कर 35 से 50 फीसद तक कारोबार होने लगा।

तेजी से बढ़ी खरीदारी

लंबे समय से लोग घरों में बंद थे। न खरीदारी कर पा रहे थे, न निवेश। लॉकडाउन की छूट के बाद वे जब घरों से निकलना शुरू किए तो सोना, हीरा की खरीदारी में तीव्र वृद्धि हुई। सोना को सुरक्षित निवेश समझा जाता है, इसलिए निवेश की दृष्टि से भी खरीदारी हुई। केसरी ने कहा, इसे आप 'रिवेंज बाइंग' कह सकते हैं। नई पेशकश भी की गई। कुछ ऑफर भी दिए गए। आभूषणों की नई रेंज जारी की गई। इससे भी कारोबार में सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए प्रोत्साहन पैकेज दिए गए। इससे बाजार में पैसा आया, और कारोबार की रौनक बढ़ी। अब संतोषजनक कारोबार होने लगा है, त्योहारों पर इसमें और वृद्धि देखने को मिलेगी।

सामाजिक दायित्व का भी निर्वाह

कोरोना काल में हीरा पन्ना ज्वेलर्स की ओर से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी का भी निर्वाह किया गया। जरूरतमंदों के बीच फूड पैकेट का वितरण किया गया। कोरोना वॉरियर्स के प्रति सम्मान प्रकट किया गया। सीईओ शरद केसरी कहते हैं, खास यह भी कि किसी भी स्टॉफ की छंटनी नहीं की गई। किसी भी स्टॉफ के वेतन में कटौती नहीं की गई। साथ ही ईपीएफ (नियोक्ता की भागीदारी) भी जमा किया गया।

संघर्ष की राह चल मिली लोकप्रियता

पाटलिपुत्र कालोनी के निवासी शेखर केसरी कहते हैं, आभूषण व्यवसाय मेरा पुश्तैनी कारोबार है। मैं तीसरी पीढ़ी हूं। वाणिज्य महाविद्यालय से स्नातक करने के बाद सीधे व्यापार में उतरा। पिता सतीश कुमार केसरी ने मुझे भरोसे के साथ व्यापार की बागडोर थमाई। मेरे सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। अपने को साबित करना था, परिवार के भरोसे पर खरा उतरना था, आभूषणों के प्रति ग्राहकों की दिलचस्पी और संतुष्टि बढ़ाना और कारोबार को शीर्ष पर ले जाना भी मेरी नैतिक जिम्मेदारी थी। संघर्ष से यह सब हासिल किया लेकिन मेरा मकसद बड़ा था। वह था कि हीरा पन्ना ज्वेलर्स पूर्वी भारत में आभूषणों की दुनिया में बदलाव का वाहक बने। मुझे संतोष है कि आज देश-दुनिया में पेश नए आभूषणों को खोजने के लिए लोग हीरा पन्ना में ही आते हैं।

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