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Bihar News: असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की दहलीज पर 13 फर्जी अभ्यर्थी धराए, दो पर FIR का आदेश

Published: Mon, 02 Nov 2026 03:23 PM (IST)

बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की दहलीज पर पहुंचे 13 फर्जी अभ्यर्थियों का चयन रद्द कर दिया गया ...और पढ़ें

नौ महीने की जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल

नौ महीने की जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल

जागरण संवाददाता, पटना। जिन हाथों में छात्रों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी आने वाली थी, वे खुद फर्जी दस्तावेजों की बैसाखी पर टिके थे। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की दहलीज पर पहुंचे ऐसे 13 कागजी गुरु नौ महीने की सघन जांच में बेनकाब हुए।

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (बीएसयूएससी) ने दो महिलाओं समेत सभी फर्जी अभ्यर्थियों का चयन तत्काल प्रभाव से रद कर दिया।

नौ महीने की जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल

मामला सिर्फ उम्मीदवारी छिनने तक सीमित नहीं रहा। आयोग ने पांच अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की, जबकि दो के खिलाफ एफआइआर कराने का आदेश दिया गया है। जांच में सामने आए मामलों ने विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

भूगोल में सबसे ज्यादा, समाजशास्त्र में भी धांधली

बीएसयूएससी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विस्तृत जांच रिपोर्ट में उच्च शिक्षा में सेंधमारी के कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं। इन अभ्यर्थियों ने कला और विज्ञान संकाय के महत्वपूर्ण विषयों में नियुक्ति पाने की कोशिश की थी।

पांच अभ्यर्थियों ने भूगोल में लगाया दांव

इतिहास, गणित, मनोविज्ञान और दर्शनशास्त्र जैसे विषयों में भी अनुचित तरीके से प्रवेश की कोशिश हुई। हालांकि, सबसे ज्यादा मामले भूगोल और समाजशास्त्र में सामने आए। पकड़े गए 13 अभ्यर्थियों में पांच अकेले भूगोल विषय के हैं, जबकि तीन अभ्यर्थियों ने समाजशास्त्र में फर्जीवाड़ा करने का प्रयास किया।

पटना से मुंगेर तक विश्वविद्यालयों में पैठ की कोशिश

फर्जीवाड़े का दायरा किसी एक शहर या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं था। इन अभ्यर्थियों ने राज्य के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति हासिल करने की कोशिश की थी। आयोग की नौ महीने की जांच में अलग-अलग विश्वविद्यालयों से जुड़े 13 मामले सामने आए।

मुंगेर और मधेपुरा विश्वविद्यालय में सबसे ज्यादा मामले

आंकड़ों के मुताबिक, मुंगेर विश्वविद्यालय और भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (मधेपुरा) से जुड़े तीन-तीन मामले सामने आए। मुजफ्फरपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय में दो फर्जी अभ्यर्थियों के मामले मिले।

पटना विश्वविद्यालय में भी पहुंची फर्जीवाड़े की आंच

राज्य के प्रतिष्ठित पटना विश्वविद्यालय में भी एक फर्जी अभ्यर्थी ने असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की कोशिश की थी। आयोग की कार्रवाई से स्पष्ट है कि नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच को लेकर अब और सख्ती बरती जा रही है।

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