अनुमंडल अस्पताल रजौली के चिकित्सक डॉक्टर सतीश चंद्र सिंहा के साथ गाली-गलौज करते हुए जान मारने की धमकी दी गई। घटना से आहत चिकित्सक ने प्राथमिकी के लिए थाने में लिखित आवेदन दिया है।

चिकित्सक ने बताया है कि मंगलवार को सुबह 11 बजे चिकित्सीय कार्य व्यस्त था। तभी एक आदमी अपना मोबाइल देकर दूसरे किसी व्यक्ति से बात करने को कहा। मैं उस समय मरीज देखने में व्यस्त था। इस कारण बात करने से मना कर दिया। इसके बाद दोपहर करीब 2:15 बजे थाना क्षेत्र के शोहदा गांव निवासी राम अवतार प्रसाद का पुत्र देवेंद्र यादव जो कि एक पैर से हल्का दिव्यांग है, वह आया और गाली गलौज किया। तथा जान से मार देने की धमकी दी। अनाप-शनाप बोलकर घंटों धमकाता रहा। जिसका फुटेज सीसीटीवी कैमरा में भी देखा जा सकता है। इस हंगामे के दौरान बीच बचाव में ना कोई स्टाफ आया और न ही गार्ड आया। लोग उससे डर रहे थे। चिकित्सक ने कहा कि असुरक्षा को लेकर 22 जुलाई 19 को भी थाने में आवेदन दिया था। उसके बाद भी यहां कोई सुरक्षा का कारगर उपाय नहीं किया गया। चिकित्सक ने थानाध्यक्ष से दोषी व्यक्ति पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। चिकित्सक के आवेदन को अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर एनके चौधरी द्वारा अग्रसारित किया गया है। इस बावत थानाध्यक्ष सुजय विद्यार्थी ने कहा कि आवेदन मिला है जांच-पड़ताल की जा रही है। प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

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गर्भवती को पहुंचाया जा रहा निजी क्लीनिक

संवाद सूत्र, रजौली : अनुमंडलीय अस्पताल परिसर रजौली में संचालित प्रसव वार्ड से मंगलवार को रेफर किए गए महिला को आशा के द्वारा निजी क्लीनिक पहुंचाने की बात सामने आई है।

बताया जाता है कि मंगलवार को थाना क्षेत्र करीगांव निवासी राजेश कुमार की पत्नी सुमन कुमारी प्रसव वेदना से अस्पताल में कराह रही थी। जिसे चिकित्सक सतीश चंद्र सिंहा ने सदर अस्पताल नवादा रेफर कर दिया। तब ड्यूटी पर रही जीएनएम संजू एवं पुष्पलता कुमारी के द्वारा एंबुलेंस को बुलाया गया। लेकिन आशा कार्यकर्ता द्वारा उसे निजी नर्सिंग होम में पहुंचा दिया गया। ड्यूटी पर रहे चिकित्सक सतीश चंद्र सिंहा से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लीवर पेन रहने के कारण महिला को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल नवादा रेफर कर दिया था। लेकिन जो सूचना है उसके अनुसार आशा द्वारा उसे निजी क्लिनिक में पहुंचा दिया गया है। इस बाबत सीएस का कहना है कि पीड़ित या उसके परिजन द्वारा लिखित आवेदन दिया जाएगा तो आशा के खिलाफ सीसीटीवी फुटेज व शिकायत के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

वैसे रजौली अस्पताल में इस प्रकार का कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी ऐसी शिकायतें मिलती रही है। पिछले दिनों रजौली के एक नर्सिंग होम को सील करने के बाद कुछ दिनों तक निजी क्लीनिक संचालकों में हड़कंप रहा। लेकिन मामला ठंडा होते ही पुन: आशा कार्यकर्ताओं की मिलीभगत से मरीजों का आर्थिक दोहन शुरू कर दिया गया है। पिछले दिनों एक निजी क्लीनिक में प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्त्राव के कारण महिला की मौत हो गई थी। उस वक्त भी आशा के द्वारा ही मरीज को निजी क्लीनिक पहुंचाने की बात मृतका के परिजनों ने कही थी।

Posted By: Jagran

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