नगर पंचायत क्षेत्र में छिनतई व झांसा देकर रुपये उड़ाने की घटना को रोकने में पुलिस सफल नहीं हो रही है। इस प्रकार की घटनाओं को आम तौर पर बैंक परिसर के इर्द-गिर्द अंजाम दिया जाता है। सबसे दिलचस्प पहलू है कि जो भी छिनतई की घटनाएं हो रही है, एक ही स्टाइल में होने के बाद भी पुलिस के हाथ उचक्कों से दूर है। उचक्कें बैंक से पैसा निकालने वाले व्यक्ति पर पैनी नजर रखते हैं। जो व्यक्ति सीधे-साधे लगते हैं, वे उन्हें निशाना बनाते हैं। दो माह के अंदर बारह घटनाएं हो चुकी है। शुक्रवार को पंजाब नेशनल बैंक में निर्भय कुमार नामक व्यक्ति लूट गए। बैंक से तीन लाख रुपये की निकासी कर निर्भय कुमार गेट से बाहर निकले थे कि उचक्का गिरोह के एक सदस्य ने दो हजार के नोट दिखाकर पांच सौ का गड्डी देने को कहा। उचक्के ने दो हजार रुपये के पचास नोट की गिनती कर पांच सौ रुपये का दो गड्डी देने को कहा। निर्भय ने थैले से पांच सौ की गड्डी निकाल दे दिया और उचक्का दूसरे पॉकेट में रखे नोट की गड्डी देकर चलता बना। जब निर्भय घर पहुंचकर रुपये की गिनती करने लगे तो माथा पीट लिया। उचक्के द्वारा दिए नोट में आगे पीछे दो-दो हजार का नोट तथा बीच में सौ रुपये के नोट देख बेहोश हो गए। इसी तरह एक सप्ताह पूर्व उचक्कों ने स्टेट बैंक परिसर से एक ग्राहक का 65000 हजार तथा कंचन कुमारी का 35000 रुपये लेकर चलता बने थे। एक पखवारा पूर्व नसीमा खातून का पीएनबी के समीप से 41000 रुपये लेकर चलता बने। समाजसेवी मोहित कुमार ने कहा कि उचक्क हमेशा एक ही स्टाइल में घटना का अंजाम दे रहे हैं फिर भी न तो लोग सतर्क हो रहे हैं और न ही पुलिस वैसे लोगों की पहचान व गिरफ्तारी कर पा रही है। यदि बैंक परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरा को खंगाला जाए तो वैसे संदिग्धों की पहचान संभव है। लेकिन पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर अपना पल्ला झाड़ लेती है।

Posted By: Jagran

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