पिछले दो वर्षो से सुखाड़ की मार झेल रहे वारिसलीगंज प्रखंड के किसानों को महज 30 से 35 प्रतिशत धान की रोपाई का लाभ मिलने की आशा क्षीण होती जा रही है। सुखाड़ का सामना करते हुए किसानों ने पर्याप्त पूंजी लगा कर धान की रोपाई की थी। हथिया नक्षत्र में हुई बारिश के बाद रोपे गए पौधे में जान आ गई थी। फसल जब तैयार होने को था तो शनिवार की शाम हवा के साथ हल्की बारिश ने पौधों को हिला कर रख दिया। इस दौरान पौधों में निकल रहे धान की बाली हवा के दबाव में आकर जमीन पर गिर गई। फलत: उत्पादन प्रभावित होना तय हो गया है। खेतों में गिरे पौधे को देख किसानों में मायूसी है।

प्रखंड क्षेत्र के लगभग सभी पंचायत के किसानों ने कमोवेश धान की रोपनी की थी। परन्तु रोपाई के साथ तीखी धूप के कारण कई पंचायतों में पौधे सूख गए थे। धान लगी खेत मवेशियों का चारागाह बन गया था। कुछ पंचायतों में पटवन कर पौधों को सुरक्षित रखा गया। जिसमें हथिया नक्षत्र की वर्षा ने संजीवनी का काम किया। धान के पौधे लहलहाने लगे थे और समय से उसमें बाली भी निकलने लगी थी। पर किसानों को यह कहां पता कि उन्हें फिर से इंद्र देवता और पवन देव की नाकृपा झेलनी पड़ेगी। जिसका परिणाम शनिवार की शाम किसानों को देखना पड़ा। कई बीघा में लगी धान गिरकर बर्बाद हो गई है। किसान बताते हैं कि खेतों में गिर गए धान की फसल से आधी से अधिक उत्पादन में कमी आ जाएगी। बताते हैं कि गिरे हुए धान की बाली में धान के स्थान पर खखरी होने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में मजदूर भी कटाई में आनाकानी करते है। खेत साफ करने में विलंब होने पर रबी फसल भी प्रभावित होगी।

Posted By: Jagran

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