छठ से पहले मना छठ महापर्व, छात्राओं ने अर्घ्य देकर जीवंत की परंपरा; नवादा स्कूल में गीतों से गूंजा परिसर
नवादा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भरौसा में छात्राओं ने छठ महापर्व की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा में ...और पढ़ें

स्कूल परिसर बना छठ घाट
HighLights
छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में छठ महापर्व की झांकी प्रस्तुत की।
विद्यालय परिसर छठ घाट में बदल गया, लोक आस्था दिखी।
बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का उद्देश्य रहा।
जागरण संवाददाता, नवादा। नवादा में छठ महापर्व की छटा अभी से देखने को मिलने लगी है। बाजार से लेकर गांवों तक छठी मईया के गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। इसी बीच नवादा के एक सरकारी स्कूल में बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से लोगों का दिल जीत लिया।
यहां छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर छठ महापर्व की ऐसी झांकी प्रस्तुत की, मानो विद्यालय परिसर ही छठ घाट बन गया हो। सूर्यदेव को अर्घ्य देने से लेकर छठी मईया की आराधना तक के दृश्य देखकर उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
स्कूल परिसर बना छठ घाट, सूप-दउरा के साथ दिखी लोक आस्था की झलक
बुधवार को नवादा सदर प्रखंड की ओरैना पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भरौसा में छठ महापर्व पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान बच्चों ने भरौसा गांव के तालाब पर छठ घाट की झांकी प्रस्तुत की। पारंपरिक वेशभूषा में सजी छात्राओं ने सूप, दउरा, ठेकुआ और मौसमी फलों से सजे प्रसाद के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा का सुंदर प्रदर्शन किया।

छठी मईया के गीतों ने बांधा समां, बच्चों की प्रस्तुति ने मोहा मन
कार्यक्रम में छठी मईया के पारंपरिक गीतों और सामूहिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। विद्यार्थियों ने सूर्योपासना और छठी मईया की आराधना के माध्यम से महापर्व की धार्मिक मान्यताओं को जीवंत किया।
छात्राओं की प्रस्तुति में छठ की परंपरा, श्रद्धा और लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में निशा कुमारी, आराध्या कुमारी शर्मा, नेहा कुमारी, संजना कुमारी, स्वीटी कुमारी, प्रीति कुमारी, कुमकुम कुमारी, करिश्मा कुमारी, काजल कुमारी, राखी कुमारी समेत कई छात्राओं ने भाग लिया।

किताबी पढ़ाई के साथ संस्कृति और संस्कारों का पाठ
विद्यालय के प्रधानाचार्य सुजीत कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था।
प्रधानाचार्य ने कहा कि शिक्षा का मकसद केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों को अपनी संस्कृति, संस्कार और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराना भी है। ऐसे आयोजन बच्चों में अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान और जुड़ाव पैदा करते हैं।
स्वच्छता कर्मियों ने संवारा छठ घाट, शिक्षकों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षक सूर्यभूषण प्रसाद, संजीव कुमार, कुणाल, मो. वशी, सुनीता कुमारी, बबली कुमारी, सुधा कुमारी, सोनी कुमारी और मंजू कुमारी मौजूद रहे।
वहीं, ओरैना पंचायत के स्वच्छता पर्यवेक्षक प्रेम कुमार शर्मा ने स्वच्छता कर्मियों के सहयोग से झांकी के लिए तैयार छठ घाट की साफ-सफाई कराई।

बच्चों ने दिया लोक संस्कृति को सहेजने का संदेश
इस आयोजन के जरिए विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी हैं।
बच्चों की इस पहल की सराहना हो रही है। विद्यालय की यह झांकी नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने की एक सुंदर कोशिश बनकर सामने आई।
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