थाना क्षेत्र के नक्सल प्रभावित महुडर पंचायत की आदिवासी बहुल चड़रा गांव में रविवार की रात लगभग आठ बजे ओझा गुनी बताकर एक वृद्ध की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक 60 वर्षीय डोमरा भुल्ला उसी गांव के रहने वाले थे। घटना के बाद आरोपित वहां से फरार हो गए।

बताया जाता है कि तकरीबन छह माह पहले गांव के ही सुनील भुल्ला के पुत्र की मौत हो गई थी। सुनील व उसके परिजनों का मानना था कि डोमरा ने ही तंत्र-मंत्र के सहारे पुत्र को मार डाला है। इसी को लेकर दोनों में विवाद चला आ रहा था। रविवार की रात भी दोनों में कहा-सुनी हो गई। बात बढ़ते-बढ़ते नौबत मारपीट तक पहुंच गई। इसके बाद डोमरा की जमकर पिटाई कर दी गई। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद पुलिस वहां पहुंची और पिटाई से जख्मी हुए वृद्ध को पीएचसी कौआकोल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने देखते ही उसे मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया। इधर, मृतक की पत्नी चिता देवी ने थाने में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि आपसी विवाद में वारदात को अंजाम दिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इधर, सोमवार को पकरीबरावां एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा ने घटनास्थल पहुंच कर मामले की छानबीन की। किसी भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

ओझा-गुनी, डायन-कमान, भूत-प्रेत के चक्कर में आए दिन इस प्रकार की घटनाएं जिले में हो रही है। कुछ महीने पूर्व डायन के संदेह सिरदला व गोविदपुर इलाके की दो महिलाओं की हत्या हुई थी। आधुनिक युग में भी लोग अंधविश्वास से निकल नहीं पा रहे हैं।

Posted By: Jagran

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