पटना-रांची रूट पर आफत: रजौली-बख्तियारपुर फोरलेन बना 'डेथ ट्रैप', अवैध कट और मवेशी बन रहे हादसों की वजह
रांची-पटना को जोड़ने वाला रजौली-बख्तियारपुर फोरलेन अवैध कट, बैरिकेडिंग की कमी और आवारा पशुओं के कारण 'डेथ ट्रैप' बन गया है, जिससे लगातार हादसे हो रहे हैं।

अवैध कट और मवेशी बन रहे हादसों की वजह
HighLights
फोरलेन पर अवैध कट और बैरिकेडिंग की कमी।
आवारा पशु और अवैध पार्किंग बढ़ा रहे दुर्घटनाएं।
स्थानीय लोगों ने सुरक्षा उपायों की तत्काल मांग की।
संवाद सूत्र, गिरियक। रांची–पटना को जोड़ने वाला रजौली–बख्तियारपुर नवनिर्मित फोरलेन सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। फोरलेन पर जगह-जगह बने अवैध कट, सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग का अभाव, आवारा पशुओं की आवाजाही और किनारों पर होने वाली अवैध पार्किंग के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग हर सप्ताह इस मार्ग पर कोई न कोई सड़क हादसा होता है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अब तक प्रभावी पहल नहीं की गई है।
डिवाइडर में दर्जनों स्थानों पर अवैध कट
ग्रामीणों के अनुसार फोरलेन के डिवाइडर में दर्जनों स्थानों पर अवैध कट बने हुए हैं। इनका उपयोग वाहन चालक गलत दिशा में प्रवेश करने और यू-टर्न लेने के लिए करते हैं। आसपास के गांवों के लोग भी इन्हीं कटों से जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हैं।
तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक पैदल यात्री या बाइक आने से चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाते और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। कई बार लोगों को बचाने के प्रयास में वाहन चालक स्वयं हादसे का शिकार हो जाते हैं।
फोरलेन के किनारे ही वाहन खड़े
स्थिति को और गंभीर बना रही है सड़क के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग का नहीं होना। सुरक्षा अवरोध नहीं रहने के कारण भारी ट्रक, बस और अन्य वाहन चालक फोरलेन के किनारे ही वाहन खड़े कर देते हैं। इससे पीछे से आने वाले वाहनों के लिए अचानक खतरा उत्पन्न हो जाता है। रात के समय यह स्थिति और भी जोखिमपूर्ण हो जाती है।
वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि फोरलेन से सटे गांवों में मकान निर्माण के दौरान लोग सड़क किनारे ही गिट्टी, बालू, ईंट और अन्य निर्माण सामग्री रख देते हैं। इससे सड़क का शोल्डर संकरा हो जाता है और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी होती है। कई बार अचानक सामने सामग्री मिलने पर वाहन असंतुलित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
पशु आने पर चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठते हैं
इसके अलावा दिन-रात आवारा गाय, बैल और अन्य मवेशियों की आवाजाही भी बनी रहती है। तेज गति से चल रहे वाहनों के सामने पशु आने पर चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठते हैं। कई स्थानों पर पर्याप्त चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और क्रैश बैरियर भी नहीं हैं, जिससे रात में दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को इन समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अवैध कट बंद कराने, बैरिकेडिंग लगाने और सड़क सुरक्षा के अन्य उपाय करने की दिशा में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़े हादसे होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या कहते हैं ग्रामीण
बिपिन कुमार यादव, गिरियक निवासी ने कहा, रजौली बख्तियारपुर फोरलेन पर बने अवैध कट हादसों की सबसे बड़ी वजह हैं। लोग इन्हीं कटों से सड़क पार करते हैं और कई वाहन चालक भी गलत दिशा में प्रवेश कर जाते हैं। इससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
वहीं अवधेश यादव ने कहा कि सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग नहीं होने से ट्रक और अन्य वाहन किनारे खड़े कर दिए जाते हैं। कई लोग सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट भी रख देते हैं। साथ ही आवारा पशुओं की आवाजाही से खतरा और बढ़ गया है। संबंधित विभाग को सभी अवैध कट बंद कर सुरक्षित यू-टर्न की व्यवस्था, बैरिकेडिंग, क्रैश बैरियर और चेतावनी संकेतक जल्द लगाने चाहिए।
नियमित अभियान चलाने की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, संबंधित निर्माण एजेंसी और सड़क सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों से संयुक्त निरीक्षण कर सभी अवैध कट बंद कराने, सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग एवं क्रैश बैरियर लगाने, अवैध पार्किंग पर रोक लगाने, सड़क किनारे रखी निर्माण सामग्री हटवाने, चेतावनी संकेतक एवं रिफ्लेक्टर लगाने तथा आवारा पशुओं को मुख्य मार्ग से हटाने के लिए नियमित अभियान चलाने की मांग की है।
उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई हुई तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है
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