नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले से नाराज दिखे पुश्तैनी गांव वाले, कल्याण बिगहा में छलका लोगों का दर्द
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले से उनके पैतृक गांव कल्याण बिगहा के लोग भावुक और निराश हैं। नालंदा ...और पढ़ें

नीतीश कुमार के पुश्तैनी गांव में लोग भावुक
HighLights
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से गांव वाले दुखी।
कल्याण बिगहा में मुख्यमंत्री के फैसले पर नाराजगी।
ग्रामीणों को नीतीश कुमार से भावनात्मक जुड़ाव महसूस।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले ने उनके पुश्तैनी गांव Kalyan Bigha में लोगों को भावुक कर दिया है। गांव में इस फैसले को लेकर नाराजगी और मायूसी दोनों नजर आ रही है।
नालंदा जिले के इस छोटे से गांव में लोग मुख्यमंत्री के फैसले को लेकर खुलकर अपनी भावनाएं जाहिर कर रहे हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला करेंगे।
महिलाओं ने जताई हैरानी
गांव की कई महिलाओं ने कहा कि वे इस फैसले को समझ नहीं पा रही हैं। उनका कहना है कि इतने वर्षों तक बिहार का नेतृत्व करने वाले नेता अचानक मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा क्यों जा रहे हैं, यह बात उन्हें समझ में नहीं आ रही।
महिलाओं का कहना है कि नीतीश कुमार ने बिहार के लिए बहुत काम किया है और उन्हें उम्मीद थी कि वे आगे भी मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य का नेतृत्व करते रहेंगे।
गांव में चर्चा का बना मुख्य मुद्दा
कल्याण बिगहा में इन दिनों यही चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। गांव के चौपाल से लेकर घरों तक लोग इसी फैसले पर बात कर रहे हैं।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला अचानक लिया गया लगता है, इसलिए लोग इसे लेकर हैरान हैं। वहीं कई लोग इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी मान रहे हैं।
नीतीश से भावनात्मक जुड़ाव
ग्रामीणों का कहना है कि नीतीश कुमार का इस गांव से गहरा भावनात्मक रिश्ता रहा है। जब भी वे गांव आते थे तो लोगों से सीधे मिलते थे और उनकी समस्याएं सुनते थे।
यही वजह है कि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने की खबर से गांव के लोग भावुक हो गए हैं। कई लोग मानते हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान ही गांव के लिए गर्व की बात रही है।
फैसले को लेकर उठ रहे कई सवाल
गांव के लोगों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि नीतीश कुमार ने यह फैसला लिया। हालांकि अभी तक इसके पीछे की पूरी राजनीतिक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है।
कुछ लोग उम्मीद जता रहे हैं कि चाहे वे राज्यसभा जाएं या नहीं, लेकिन बिहार और अपने गांव से उनका जुड़ाव पहले की तरह बना रहेगा।
लोगों को अब भी उम्मीद
गांव के कई बुजुर्गों का कहना है कि नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में लंबा समय दिया है और राज्य के विकास में उनकी बड़ी भूमिका रही है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि चाहे उनकी भूमिका बदले, लेकिन वे बिहार और अपने गांव के विकास के लिए आगे भी काम करते रहेंगे।
नोट- पीटीआई के इंनपुट के साथ
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