मुजफ्फरपुर, जासं। बाल हृदय योजना से ग्रामीण इलाके के बच्चों को बचाने में कामयाबी मिल रही है। अब धन की मोहताज नहीं रह गई है धड़कन। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के माध्यम से हृदय रोग से ग्रस्त बच्चों की पहचान व उनका इलाज चल रहा है। इस योजना में दो साल में 34 बच्चों के दिल के छेद का आपरेशन किया गया है। इसका सारा खर्च सरकार उठा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सक डा.एके दास ने कहा कि हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इस साल का थीम वाक्य है 'हर दिल के लिए दिल का इस्तेमाल करें'।

समय पर शल्यक्रिया से होता बचाव

हृदय रोग विशेषज्ञ डा.अंशु अग्रवाल ने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार एक हजार बच्चों में से एक बच्चा जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित होता है। इनमें लगभग 25 प्रतिशत नवजात बच्चों को प्रथम वर्ष में शल्य क्रिया की आवश्यकता रहती है। बताया कि कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी बच्चों के हृदय में छेद हो सकता है। आरबीएसके के नोडल पदाधिकारी डा.निशांत ने बताया कि जिले में बाल हृदय योजना के तहत स्कूल व आंगनबाडी सेंटर पर जांच की जाती है। इसके लिए 43 चिकित्सक, 17 फार्मासिस्ट, 17 एएनएम की सेवा ली जा रही है। 23 टीमें बनी हुईं हैं।टीम संदिग्ध की पहचान करने के बाद सदर अस्पताल लाती है। यहां जांच के बाद रोगी की पहचान होने के पर पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान या इंदिरा गांधी आयुर्वेद संस्थान भेजा जाता है। वहां से आपरेशन के लिए चयन होने के बाद अहमदाबाद भेजा जाता है। इलाज व आपरेशन का खर्च सरकार उठा रही है। वहीं यहां निजी अस्पताल में एंजियोप्लास्टी, एंजियोग्राफी होती है और पेसमेकर लगाया जा रहा है।

इस तरह करें हृदय रोग की पहचान

सीने में दर्द, जकड़न. गर्दन, जबड़े या पीठ में दर्द, ठंडा पसीना, जी मिचलाना, सांसों की कमी और थकान हो तो हृदय विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें। 50 साल से अधक के लोग ईसीजी जरूर कराएं। ब्लड प्रेशर की जांच भी नियमित कराते रहें।

इन बातों का रखें ख्याल

मसालेदार भोजन, जंक फूड, मैदे के बने खाद्य पदार्थ, बासी व तला-भुना और असमय भोजन से परहेज करना चाहिए। योग आसन करना चाहिए। पूरी नींद लें। मोटापे को कंट्रोल करें। भोजन में हरी सब्जियों का समावेश करें।  

Edited By: Ajit kumar

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