मुजफ्फरपुर,[अमरेंद्र तिवारी]। देश में हर तरफ अंग्रेजी शासन का आतंक था। देश के एक कोने चंपारण से किसानों की आवाज पर उनका दर्द जानने के लिए पटना से महात्मा गांधी निकले तो उनका पहला पड़ाव बना मुजफ्फरपुर। तब के भूमिहार-ब्राह्मïण कॉलेज (एलएस कॉलेज) के छात्रावास में प्रो. कृपलानी के साथ पहुंचे। स्टेशन से सीधे यहां आने के बाद रात्रि विश्राम किया।

स्वतंत्रता सेनानी रामसंजीवन ठाकुर के मुताबिक 10 अप्रैल 1917 की रात छात्रावास में ठहरने के बाद गांधी जी का विचार था- लंगट सिंह कॉलेज में ही ठहर जाएंगे। गांधी जी कहें और उनकी बात टाल दी जाए ऐसा संभव नहीं था।

आचार्य कृपलानी ने कॉलेज परिसर में रहने का इंतजाम किया। सुबह गांधी जी के पास आचार्य पहुंचे। कहा- यह सरकारी संस्थान है इसलिए यहां पर ज्यादा देर तक रहना ठीक नहीं रहेगा। आगे कहीं और पड़ाव डाला जाए। आजादी की रणनीति बने। गांधी जी चंपारण के किसानों की बदहाली को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कृपलानी की सलाह मानी। कॉलेज परिसर में स्थित कुआं पर स्नान किया। आगे की यात्रा कर प्रसिद्ध वकील गया प्रसाद सिंह के घर में कुछ दिन रुकने के बाद चंपारण गए। वहां से सत्याग्रह आंदोलन का आरंभ हुआ और वह आगे चलकर देश को आजादी दिलाने का शस्त्र बना।

गांधी से जुड़े स्थलों का हुआ विकास

महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर कॉलेज परिसर की उन तमाम चीजों का विकास किया जा रहा है, जिनसे उनका जुड़ाव रहा। कुएं को विकसित किया गया है। विशेष पत्थर से इसकी साज-सज्जा कर इसका नाम गांधी कूप कर दिया गया है।

गांधी प्रतिमा आकर्षण का केंद्र

एलएस कॉलेज के प्राचार्य डा. ओमप्रकाश राय के अनुसार, परिसर में स्थित गांधी प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रतिमा का अनावरण किया है। कॉलेज परिवार की ओर से कूप की देखरेख की जा रही है। जहां पर गांधी जी ठहरे थे उस छात्रावास को म्यूजियम के रूप में विकसित करने की पहल चल रही है। जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष व नगर आयुक्त मनेश कुमार मीणा ने स्थल निरीक्षण किया है।  

... जहां बापू ने किया विश्राम

मुजफ्फरपुर के उमाशंकर प्रसाद मार्ग स्थित स्वतंत्रता सेनानी प्रसिद्ध वकील स्व. गया प्रसाद सिंह के आवासीय परिसर में दाखिल होने के साथ महात्मा गांधी की यादें जीवंत हो जाती हैं। आज गया बाबू नहीं हैं। लेकिन, परिसर के एक कोने में खंडहर में तब्दील उनके मकान का वह हिस्सा जिसमें महात्मा गांधी ने कई दिन और रात व्यतीत किए, उसकी हर एक ईंट अंग्रेजों के खिलाफ दृढ़ता की कहानी कहते हैं। 

बापू की 150 वीं जयंती पर इस परिसर के साढ़े तीन कट्ठा जमीन को संबंधित मकान समेत सरकार ने ले लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के बाद जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने व्यक्तिगत रूचि लेकर इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि सुरक्षित और संरक्षित करने की दिशा में काम शुरू किया है। फरवरी में जिले की कमान थामने के बाद 7 मार्च 2019 को संबंधित जमीन को सरकार के नाम निबंधित कराया। जमीन दिया है बापू के साथ काम करनेवाले प्रसिद्ध वकील स्वतंत्रता सेनानी स्व. गया प्रसाद सिंह के पौत्र समाजसेवी इंदूशेखर सिंह ने। वैशाली के जंदाहा के मूल निवासी इंदूशेखर अपने सामाजिक कार्यों के कारण इलाके में छोटे गांधी के नाम से मशहूर हैं। मुजफ्फरपुर बीच शहर में कीमती जमीन सरकार को देने पर लोग इनकी प्रशंसा करते नहीं अघाते।

देह में मिïट्टी का तेल लगा सोते थे गांधी जी

गांधी जी 12 अप्रैल 1917 को स्व. बाबू गया प्रसाद सिंह के घर में रहने के लिए आए थे। यहां उनके रहने की कहानी बताते हुए बाबू गया के पौत्र नीतीश्वर सिंह महाविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर विदुशेखर सिंह बताते हैं - वो यहां जब रहते थे तो रात में शरीर में मिïट्टी तेल का लेप लगाकर सोते थे। वजह यह थी कि जिस मकान में वे रहते थे, उसकी जमीन कच्ची थी। वे लहसुन-प्याज नहीं खाते थे। उनका जीवन ही संदेश है।

 इस बारे में स्वतंत्रता सेनानी गया प्रसाद सिंह के पौत्र इंदूशेखर सिंह ने कहा‍ कि  मैंने अपनी जमीन इस कारण से सरकार को दिया ताकि बापू की यादों को संजोया जा सके। इस परिसर के विकास के पूर्वजों की कीर्ति और बापू की यादें जीवंत होंगी। मुजफ्फरपुर विश्व के मानचित्र पर आएगा।

Posted By: Ajit Kumar

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