किसानों के लिए जरूरी सलाह, 15 नवंबर तक गेहूं की बुआई से ओलावृष्टि और गर्मी से बचेगी फसल
Pusa Agriculture University: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को गेहूं और रबी मक्का की समय पर बुआई ...और पढ़ें

बुआई की तारीख में थोड़ा बदलाव करके किसान मौसम के दुष्प्रभावों से अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। फाइल फोटो
HighLights
गेहूं की बुआई 15 नवंबर तक पूरी करना फायदेमंद।
समय पर बुआई से गर्मी और ओलावृष्टि से बचाव।
रबी मक्का की बुआई 10-30 नवंबर के बीच करें।
अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Wheat Sowing Time: बदलते जलवायु और मौसम के मिजाज के बीच खेती-किसानी के तौर-तरीकों में बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया है।
अनियमित वर्षा, बाढ़, सुखाड़ और तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण खेती के समक्ष कई तरह की नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
इन प्रतिकूल प्रभावों से फसलों को बचाने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कृषि मौसम विभाग ने किसानों को खास सलाह दी है।
विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर गेहूं और रबी मक्का की बुआई का कार्य पूरा कर लें।
समय पर बोआई
कृषि मौसम विभाग के नोडल पदाधिकारी डॉ. ए. सत्तार ने बताया कि सामान्य तौर पर गेहूं की बुआई 15 नवंबर से 5 दिसंबर के बीच की जाती है।
हालांकि बदलते मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों के लिए 15 नवंबर तक बुआई पूरी करना ज्यादा फायदेमंद होगा। समय पर बुआई करने से फसल में फूल आने और दाना पकने के समय अधिक तापमान का खतरा टल जाता है।
टर्मिनल हीट स्ट्रेस
देर से बुआई होने पर फसल को 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' का सामना करना पड़ता है, जिससे पछिया हवा और गर्मी का बुरा असर पड़ता है। समय पर बुआई से फसल को अप्रैल महीने में होने वाली ओलावृष्टि के खतरे से भी बचाया जा सकता है।
दरअसल, देर से तैयार होने वाली फसल की कटाई अप्रैल तक खिंच जाती है, जबकि अप्रैल में ओलावृष्टि की करीब 70 प्रतिशत घटनाएं होती हैं।
रबी मक्का की खेती
डॉ. सत्तार ने किसानों को अक्टूबर के महीने में रबी मक्का की बुआई से बचने की खास सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बेहतर और बंपर उपज के लिए 10 नवंबर से 30 नवंबर के बीच मक्का की बुआई करना सबसे उत्तम माना गया है।
इस निश्चित अवधि में फसल के विकास के लिए पूरी तरह अनुकूल मौसम मिलने की संभावना रहती है।
पर्यावरण हितैषी खेती
किसानों को अच्छी पैदावार के लिए पर्यावरण हितैषी कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों ने फसल चक्र का सख्ती से पालन करने और रासायनिक उर्वरकों का कम से कम उपयोग करने की बात कही है।
बुआई की तारीख में थोड़ा बदलाव करके किसान मौसम के दुष्प्रभावों से अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।
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