पश्चिम चंपारण, जासं। नेपाल में शेर बहादुर देउआ के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत-नेपाल के संबंध मधुर होने लगे हैं। इसके तहत पर्यटन के क्षेत्र में दोनों देशों की पहल पर एक अहम निर्णय लिया जा रहा है। इसके अनुसार नेपाल के चितवन एवं भारत के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के करीब 4500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक बेहतर पर्यटन क्षेत्र मानते हुए इसे नया पर्यटन रूट विकसित किया जाना है। इसके लिए चितवन नेशनल पार्क एवं वीटीआर के अधिकारियों की पहल पर दोनों क्षेत्रों के भ्रमण के लिए एक पैकेज तैयार किया जाएगा। सब कुछ ठीकठाक रहा, तो नए पर्यटन सत्र में इसकी शुरुआत भी कर दी जाएगी।

वीटीआर के क्षेत्र निदेश सह वन संरक्षक एचकेे राय ने बताया कि इसके लिए शीघ्र तैयारी पूरी कर ली जाएगी। इसमें पर्यटन रूट के मुताबिक कोई भी पर्यटक वाल्मीकिनगर से नेपाल के चितवन से लेकर परसा के सौराहा होते हुए वाल्मीकिनगर तक टाइगर सफारी का आनंद ले सकेंगे। संयुक्त पैकेज में सात दिनों का भ्रमण निर्धारित किए जाने की संभावना है। इसमें पर्यटक तीन दिन वीटीआर में तथा चार दिन चितवन नेशनल पार्क में बिताएंगे। पैकेज में दर आदि का निर्धारण शीघ्र कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसमें भारत के पर्यटक वाल्मीकिनगर में आकर अपने गंतव्य को जाएंगे और नेपाल के पर्यटकों को वाल्मीकिनगर आने के बाद उनको वहीं वापस होना होगा।

वर्तमान में इस पैकेज टूर में केवल नेपाल एवं भारत के नागरिक ही शामिल हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि इसपर गुरुवार को वीटीआर आए नेपाल के गृह विभाग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में प्राथमिक स्तर पर बातचीत हो गई है। शिष्टमंडल में नेपाल के देवघाट के आरएम दुर्गा बहादुर थापा, चितवन के संजय चौधरी, ललित चौधरी, भारतपुर दो, चितवन नेपाल के गुणेश्वर महतो, चितवन के धनंजय महतो, कुमारी संजु चौधरी शामिल रहे। जबकि यहां से वीटीआर के क्षेत्र निदेशक एचके राय, डिविजन एक के उप क्षेत्र निदेशक अंबरिश कुमार मल्ल सहित रामनगर के आदर्श पांडेय, शाकेत राय एवं गोबर्धना के शिवराज महतो शामिल रहे।

वीटीआर के आसपास लोगों को दिया जाएगा रोजगार

नेपाल के गृह मंत्रालय के अधीन विभिन्न नगर पंचायतों से आए प्रतिनिधियों ने वीटीआर के अधिकारियों के साथ वहां घरवास के कंसेप्ट को साझा किया। उनके अनुसार घरवास के तहत चितवन नेशनल पार्क के आसपास के प्रत्येक गांव मे पर्यटकों के लिए होम स्टे बनाया गया है। इसके तहत बनी कमेटी पर्यटकों के रहने, खाने पीने आदि की व्यवस्था करती है। इसमें पर्यटकों के खाना आदि की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर की जाती है। इसमें होने वाले आय का 10 फीसद गांव के विकास में खर्च किया जाता है।

शेष राशि जंगल के विकास एवं संरक्षण पर खर्च किया जाता है। इसमें स्थानीय स्तर के लोगों को काफी संख्या में रोजगार मिलती है। वीटीआर प्रशासन इसी कंसेप्ट को यहां लागू करेगी। एच राय ने बताया कि इसमें पर्यटक के क्षेत्र में विकास होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिलेगा। नेपाल में जल जमीन के साथ -साथ जंगल के विकास पर जोर दिया जाता है। इसी पैटर्न पर यहां भी काम होगा और पर्यटक दोनों क्षेत्र के सांस्कृतिक विरासत का भी लुत्फ उठाएंगे।