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Unnao Accident: न परमिट, न फिटनेस और न ही बीमा... फिर भी धड़ल्ले से दिल्ली-जयपुर तक रफ्तार भर रहीं टूरिस्ट बसें

उत्तर बिहार में लग्जरी बस के नाम पर बेरोक-टोक अनफिट बसों का संचालन किया जा है। कुछ बसें तो बिना किसी परमिट के दिल्ली से लेकर जयपुर तक दौड़ रही हैं। बस संचालक खुलेआम कानून का उल्लंघन कर रहे हैं लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। उत्तर बिहार से 169 बसें हर रोज विभिन्न शहरों के लिए खुलती हैं जो ट्रैफिक नियम मानक और शर्तों को पूरा नहीं करतीं।

By Jagran News Edited By: Mohit Tripathi Thu, 11 Jul 2024 01:37 PM (IST)
न परमिट न फिटनेस... बिहार से दिल्ली, जयपुर तक सफर। (फाइल फोटो)

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार में लग्जरी बस के नाम पर अनफिट बसों का बेरोक-टोक संचालन हो रहा है। कई के पास तो परमिट तक नहीं है, बावजूद ये दिल्ली-जयपुर तक दौड़ रही हैं। इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है।

उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, शिवहर, मोतिहारी से 169 बसें हर रोज विभिन्न शहरों के लिए खुलती हैं, जो ट्रैफिक नियम, मानक और शर्तों को पूरा नहीं करती हैं। इसके बावजूद इनका संचालन हो रहा है।

इतने बेखौफ क्यों है बस संचालक?

बसों के संचालन के लिए सरकार ने कई नियम बनाए हैं, लेकिन सभी को ताक पर रखकर निजी संचालक बसों का संचालन करा रहे हैं। टूरिस्ट परमिट पर यात्री बसों को चलाया जा रहा है।

उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में स्टैंड से जयपुर, कोटा, दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, गुरुग्राम, रांची, सिलीगुड़ी तक बसें जाती हैं। इनके कागजात की जांच न खुलने के समय की जाती और न कहीं रास्ते में होती है। इस कारण बस संचालक बैखौफ और गलत तरीके से बस का संचालन करते हैं।

सीतामढ़ी के हरिमंगल झा कहते हैं कि जिले में चोरौत, मधुबनी बार्डर पर साहरघाट, सुरसंड के भिट्ठामोड़, सोनबरसा बार्डर, पुपरी और नानपुर से बसें खुलती हैं। टिकट पहले से काटकर बना रहता है। वहां बस का स्टाफ टिकट काटकर मौजूद होता है। बस आती है, उसपर पैसेंजर को बैठा देता है।

यात्रियों के साथ सामान की भी होती लोडिंग

निजी बसों में यात्रा करनेवाले यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जाता है। विरोध करने पर कभी-कभी बस परिचालक या अन्य स्टाफ मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं।

बिना परमिट के चल रही बसों की वजह से सरकारी रोडवेज बसों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। लंबी दूरी और बड़े शहरों को जाने वाली स्लीपर बसें तो चलती-फिरती ताबूत होती हैं।

ऊपर से इनमें अवैध रूप से सामान की ढुलाई भी की जाती है। बस संचालक मनमानी कर धड़ल्ले से ओवरलोडिंग कर रहे हैं, यहां तक कि बस की छतों पर भी बड़ी मात्रा में सामान ले जाया जा रहा है।

मिलीभगत के चलते परिवहन विभाग व पुलिस अधिकारी भी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कई बार तो अवैध सामान की तस्करी जैसे गांजा या शराब तक लाए जाते हैं।

अमानक तरीके से हो रहा स्लीपर कोच का निर्माण

मुजफ्फरपुर के बस बाडी मेकर मो. शहजाद कहते हैं कि स्लीपर बसों में सवारियों के साथ अधिक मात्रा में सामान भी भरा जाता है। यह सामान न केवल अंदर, बल्कि बसों की छत पर भी लाद दिया जाता है। इससे बसों की ऊंचाई और भी अधिक हो जाती है।

हाईवे पर स्लीपर बसें तेज रफ्तार में चलती हैं, अधिक ऊंचाई के कारण संतुलन बिगड़ जाता है। बस संचालक अपने फायदे के लिए यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

बस के भीतर अधिक से अधिक जगह का इस्तेमाल हो सके, इसलिए सीटों के बीच गैप नहीं छोड़ते। अधिकतर बसों में कोई सुविधा नहीं होती है।

यहां तक कि कई बसों में आपातकालीन खिड़की व प्राथमिक उपचार टूल बाक्स ही नहीं होता है। नियमानुसार किसी भी सामान को कहीं भी ले जाने के लिए उसकी बिल, रसीद या अन्य कागज की जरूरत होती है।

जिलों से चलनेवाली स्लीपर बसों में जांच के झंझट के बिना ही किसी भी प्रकार का सामान कहीं भी लाया और ले जाया जा सकता है।

क्या कहती हैं शिवहर डीटीओ ?

शिवहर डीटीओ सिमरन कुमारी कहती हैं कि बसों के परिचालन के लिए परमिट, रूट और टाइमिंग का संचालन आरटीओ मुजफ्फरपुर द्वारा किया जाता है।

उन्होंने बताया कि शिवहर में 15 सरकारी व 41 निजी बसें चलती हैं। इनमें आधे से अधिक के कागजात फेल हैं। शीघ्र ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। शिवहर से जिस बस से हादसा हुआ है। उसकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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