मुजफ्फरपुर, जेएनएन। देवोत्थान एकादशी के अवसर पर सोमवार को श्रद्धालु भक्तों ने व्रत रखते हुए लक्ष्मी नारायण की पूजा की। रात्रि में जगह-जगह तुलसी-शालिग्राम विवाह का रस्म भी हुआ। बाबा गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं.विनय पाठक ने बताया कि वैसे तो सभी एकादशी ही पापों से मुक्त होने के लिए की जाती है, लेकिन देवोत्थान एकादशी का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। राजसूर्य यज्ञ करने से जो पुण्य की प्राप्ति होती है, उससे कई गुना अधिक पुण्य देवोत्थान यानी प्रबोधनी एकादशी का होता है।

आचार्य विष्णु शर्मा ने बताया कि इस दिन तुलसी विवाह का भी विशेष महत्व है। लोग बड़े धूमधाम से तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं। इस दिन के बाद शादी-विवाह के उत्सव शुरू हो जाते हैं। सदर अस्पताल स्थित मां सिद्धेश्वरी दुर्गा मंदिर के पुजारी पं.देवचंद्र झा ने बताया कि मान्यता है कि जो मनुष्य तुलसी विवाह करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। तुलसी विवाह के दिन दान का भी महत्व है। इस दिन कन्या दान को सबसे बड़ा दान माना जाता है। कई लोग तुलसी-विवाह का आयोजन कर कन्यादान का पुण्य प्राप्त करते हैं।

फलाहारी मठ में तुलसी विवाह

साहू पोखर स्थित फलाहारी मठ में धूमधाम से शालिग्राम-तुलसी विवाह का आयोजन हुआ। भगवान के अभिषेक के बाद सुंदर वस्त्र पहनाए गए। आसन पर बैठाया गया। विधिवत विवाह हुआ। महाभोग भी लगाया गया। प्रधान पुजारी राम कुमार दास ने आरती की। सबने भगवान विष्णु की परिक्रमा भी की। इस अवसर पर महंत पवन दास, पुजारी मनोज दास, भाजपा नेता प्रभात कुमार, राकेश तिवारी, सुनीता देवी, बिंदु देवी आदि मौजूद रहीं।

मां वैष्णो ज्योति मंदिर में भी मना उत्सव

बैंक रोड स्थित मां वैष्णो ज्योति मंदिर में धूमधाम से उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर को रंगबिरंगे गुब्बारे व फूलों से सजाया गया था। पुजारी आचार्य गौतम कृष्ण ने भगवान शालिग्राम की विधिवत पूजा के बाद महाआरती की। इस अवसर पर बाबा गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पं.विनय पाठक, दीपक कुमार बबलू, गिरधारी प्रसाद, पंकज कुमार, कैलाश प्रसाद आदि मौजूद रहे। 

Posted By: Ajit Kumar

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