मुजफ्फरपुर, जेएनएन। शहर में बाजार के लिए निकले हों या ग्रामीण क्षेत्रों में, जर्जर तारों के जंजाल से किसी सूरत में बचा नहीं जा सकता है। शहर के हर पोल पर जर्जर तारों का जंजाल फैला हुआ है। सार्वजनिक स्थलों से लेकर रेलवे स्टेशन तक यही स्थिति बनी हुई है। इसके कारण प्रतिदिन किसी न किसी पोल में घर के सामने स्पार्किंग की घटनाएं होती रहती हैं। इससे आग लगने की आशंका बनी रहती है। बिजली के जर्जर तारों की वजह से जिले में दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं।

 रविवार को दैनिक जागरण ने जर्जर व लटके तारों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले दृश्य नजर आए। लेकिन विभाग के अधिकारी इन तारों को बदलने की जहमत नहीं उठाते। शहर के पोखरियापीर, सादपुरा, भगवानपुर, सिकंदरपुर, बालूघाट, मिस्कॉट आदि दर्जनों मोहल्ले में जगह-जगह तार लटक रहे हैं। हल्की हवा चलने, बारिश होने व हाई वोल्टेज के कारण तार टूट रहे हैं। इसके कारण कभी भी हादसा हो सकता है। शहर के व्यवसायी हन्नी सिंह, मुकेश कुमार आदि ने बताया कि बिजली विभाग के अधिकारियों को तार बदलने की सूचना हमेशा दी जाती है। लेकिन कोई सुनने ही वाला नहीं है।

विभाग बना उदासीन

जिले में अब तक करंट लगने से कई बिजली मिस्त्री सहित दर्जनों आम लोगों की जानें जा चुकी हैं। जख्मी होने से कई लोग दिव्यांगता के शिकार हो गए हैं। इतनी सारी घटनाएं घटित होने के बाद भी विभाग उदासीन बना हुआ है।

शहर के कई ट्रांसफॉर्मर के नीचे सजती फुटपाथी दुकानें

मिठनपुरा रोड, पानी टंकी चौक, बहलखाना रोड, मोतिझील, साहु रोड, दीवान रोड सहित शहर के दर्जनों ऐसी जगहें हैं, जहां ट्रांसफॉर्मर के नीचे फुटपाथी दुकानें सजाईं जाती हैं। बिजली तार के नीचे बड़े स्वाद के साथ फुटपाथी दुकानों के सामान ग्रहण करते हैं। यह लापरवाही जानलेवा हो सकती है।

लोग भी हादसे के होते जिम्मेवार

शहर के सिकंदरपुर, छीटभगवतीपुर सहित बांध किनारे के अन्य कई मोहल्ले, ग्रामीण क्षेत्रों में मेन तारों में टोंका फंसा कर टेढ़ें व लटकते तारों के जंजाल को अपने घरों तक ले जाते हैं। बच्चे भी उसी तार के नीचे खेलते रहते हैं। जरा सी चूक हो जाए तो जान जा सकती है। इसका जिम्मेदार बिजली विभाग नहीं बल्कि उस मोहल्ले के लोग खुद होते हैं। आखिर ऐसे बिजली तारों को अपने घरों तक ले जाने का अपराध क्यों करते हैं। कभी भी मौत का कनेक्शन साबित हो सकते हैं।

बैरिया में मजदूर की मौत पर हुआ था बवाल

बैरिया में स्पर्शाघात से दो मजदूरों की मौत पिछले महीने हो चुकी है। इसको लेकर वहां काफी बवाल भी हुआ था। आरपीएफ के दारोगा ने हाईटेंशन तार के नीचे जमीन खरीदकर घर बना लिया है। सेंटङ्क्षरग करने के लिए दो मजदूर बांस बांध रहे थे। इसमें एक मजदूर की मौत हो गई तथा दूसरा गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। जख्मी का इलाज एसकेएमसीएच में कराया गया। मुआवजे की मांग को लेकर भारी बवाल हुआ। अहियापुर थाने की पुलिस ने समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया था।

इस बारे में कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार ने कहा कि आइपीडीएस के तहत शहरी क्षेत्र व उसके आसपास के इलाकों में जर्जर-तार पोल बदलने का काम वीटीएल कंपनी को दिया गया है। ग्रामीण इलाके में जैक्शन कंपनी काम कर रही है। दोनों एजेंसी के लोगों ने काम शुरू कर दिया है। 

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