मुजफ्फरपुर। कुढ़नी में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान वानिकी महाविद्यालय ढोली के कृषि वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि फसल चक्र से खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। उन्होंने फसल की उपज बढ़ाने के लिए फसल चक्र से खेती करने का सुझाव किसानों को दिया। वह शनिवार को अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र तुर्की में बायोटेक किसान हब का उद्घाटन कर रहे थे। कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है। केंद्र सरकार ने कृषि के विकास के लिए रोड मैप तैयार किया है। पिछड़े हुए जिले में बायोटेक किसान हब बनाया गया है। इसके लिए कुढ़नी प्रखंड के केरमा गाव चयनित किया गया है। यहा के 40 किसानों का चयन कर उन्हें उन्नत किस्म के तेलहन, सब्जी, फल-फूल समेत अन्य तरह के बीज उपलब्ध कराए गए। कृषि वैज्ञानिक डॉ.एमएस कुंडू ने कहा कि खेतों में रसायनिक खाद व कीटनाशक दवा का छिड़काव करने से खेतों की उर्वरा शक्ति घटी है। खेत बंजर होते जा रहे हैं। इससे बचाने के लिए जैविक खेती जरूरी है। किसानों के बीच धनिया के बीज का वितरण किया गया। मौके पर कृषि वैज्ञानिक डॉ.पुष्पा सिंह, डॉ.एमएल मीणा, डॉ.सुरेश कुमार वर्मा, संतोष कुमार, रोहित मौर्य, निधि कुमारी ने उन्नत खेती पर विस्तार से चर्चा की।

खाद्य सुरक्षा बनाए रखने को मृदा का स्वस्थ होना जरूरी : मोतीपुर थाना क्षेत्र के रतनपुरा गाव में कृषि विज्ञान केंद्र सरैया द्वारा विश्व मृदा दिवस मनाया गया। केंद्र की वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ.अनुपमा कुमारी ने कहा कि विश्व मृदा दिवस जनसंख्या विस्तार से बढ़ रही समस्याओं को उजागर करता है। मिट्टी के नुकसान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पांच दिसंबर को यह दिवस मनाया जाता है। खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए मृदा का स्वस्थ्य रहना आवश्यक है। मिट्टी का संरक्षण जरूरी है। रतनपुरा गांव के किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया गया। मौके पर केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ.के.के सिंह मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए मृदा स्वास्थ्य की महत्ता बताई।

Indian T20 League

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

kumbh-mela-2021