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मुजफ्फरपुर में किसानों को बेची घटिया कीटनाशी, हैदराबाद लैब की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की तैयारी

Published: Thu, 01 Oct 2026 03:03 PM (IST)

Agriculture Department Action Bihar: मुजफ्फरपुर में किसानों को अमानक जैव कीटनाशी बेचने का मामला सामने आया है, जिसमें स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस ...और पढ़ें

राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद की जांच में जीवित जीवाणुओं की संख्या तय मानक से काफी कम मिली है।

राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद की जांच में जीवित जीवाणुओं की संख्या तय मानक से काफी कम मिली है।

अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Substandard Bio Pesticide Muzaffarpur: किसानों को फसलों के रोग से बचाने के नाम पर अमानक जैव कीटनाशी बेचने का मामला सामने आया है।

जांच में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस दो प्रतिशत का नमूना अमानक पाया गया है। राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद की जांच में जीवित जीवाणुओं की संख्या तय मानक से काफी कम मिली है।

विक्रेता और कंपनी पर केस

रिपोर्ट मिलने के बाद कृषि विभाग ने संबंधित विक्रेता और निर्माण कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है।

अहियापुर स्थित जय मां अम्बे ग्रेन एजेंसी और पटना की निर्माण कंपनी कृषि विकास सहकारी समिति लिमिटेड के खिलाफ अभियोजन चलाया जाएगा। जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने अभियोजन की स्वीकृति मांगी है।

जुलाई में लिया नमूना

मेसर्स जय मां अम्बे ग्रेन एजेंसी से 24 जुलाई 2024 को स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस का नमूना लिया गया था। इसके बाद जांच के लिए सैंपल राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद भेजा गया था।

जांच रिपोर्ट आने के बाद कृषि विभाग हरकत में आया है और न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

फसल सुरक्षा में असरदार

स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस दो प्रतिशत एक प्रमुख जैविक फफूंदनाशी और वृद्धि वर्धक दवा है। इसका उपयोग धान, गेहूं, सब्जी और दलहन की फसलों में जड़ सड़न तथा झुलसा जैसे रोगों के बचाव में होता है।

किसान इसे रासायनिक दवाओं के सुरक्षित विकल्प के रूप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं।

किसानों को होगा नुकसान

जैविक कीटनाशी में प्रभावी जीवाणुओं (सीएफयू काउंट) की निर्धारित मौजूदगी बेहद जरूरी होती है। मानक से कम जीवाणु होने के कारण खेत में छिड़काव के बाद भी रोग नियंत्रित नहीं हो पाता है।

इससे किसानों को न केवल दवा की लागत का नुकसान होता है, बल्कि फसल का उत्पादन भी घट जाता है।

राष्ट्रीय लैब से जांच

राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद पौध संरक्षण से जुड़ा देश का प्रमुख संस्थान है। यहां कृषि उपज, मिट्टी, पौध रोग और कीटनाशकों की वैज्ञानिक जांच की जाती है।

इसी लैब की आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर मुजफ्फरपुर में दोषी एजेंसी और कंपनी पर शिकंजा कसा गया है।

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