मुजफ्फरपुर। स्नातक में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू है। छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक उन कॉलेजों का चुनाव करने में माथापच्ची कर रहे हैं, जहां मनपसंद विषयों में आसानी से नामांकन मिल जाए और पढ़ाई भी अच्छी होती हो। दैनिक जागरण इसके मद्देनजर कॉलेजों की पड़ताल कर रहा है। विद्यार्थियों के लिए कहां कितनी सीटें हैं और किन-किन विषयों की पढ़ाई होती है। उस कॉलेज में साधन-संसाधनों के क्या हाल हैं? इस कड़ी में गुरुवार को हमने रामवृक्ष बेनीपुरी महिला महाविद्यालय (आरबीबीएम) की पड़ताल की। पता चला कि यहां सीटों की संख्या तो पर्याप्त है, मगर शिक्षकों का ही टोटा है। इतिहास, गृहविज्ञान, मनोविज्ञान, जूलॉजी, गणित व भौतिकी में और सीटें चाहिए। वहीं कुछ विषयों में सीटें अधिक हैं तो विद्यार्थी ही कम हैं।

शिक्षक नहीं फिर भी होते नामांकन : स्नातक पार्ट वन में 16 विषयों की पढ़ाई होती है। मैथिली, भोजपुरी, पर्सियन, बांग्ला, भूगोल, कॉमर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, समाजशास्त्र की पढ़ाई नहीं होती। शिक्षकों के 26 पद हैं मगर 11 ही पदस्थापित हैं। स्नातक में कुल 2374 सीटें हैं। इन विषयों को पढ़ाने के लिए कुल 11 शिक्षक ही हैं। इनमें से कई विषयों के शिक्षक नहीं हैं। बावजूद इसके उन विषयों में नामांकन होते हैं। ऐसे में यहां पढ़ाई का हश्र सहज ही समझा जा सकता है। इसी तरह प्रैक्टिकल के लिए भी साधन व संसाधनों का अभाव है। लड़कियों का कॉलेज है इसलिए सुरक्षा की भी चिंता रहती है।

कॉलेज के आसपास मनचलों का जमावड़ा

कॉलेज कैंपस से लेकर बाहर तक मनचलों से लड़कियां भयभीत रहती हैं। शिक्षकों को भी परेशानी होती है। छात्रसंघ की काउंसिल मेंबर वंदना ने बताया कि सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। मनचले कॉलेज गेट के अंदर तक प्रवेश कर जाते हैं। लड़कियों के लिए कॉमन रूम नहीं है। सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। कई कक्षाएं सस्पेंड रह जाती हैं। प्रैक्टिकल विषयों की पढ़ाई और उनकी परीक्षाएं ठीक से नहीं होतीं। वाइफाइ व सीसीटीवी का इंतजाम होना चाहिए। विषय सीटों की संख्या शिक्षक

भौतिकी- 64 1

रसायन - 64 -

बॉटनी- 64 1

जूलॉजी- 64 1

गणित - 128 1

मनोविज्ञान- 160 1

इतिहास - 256 -

अर्थशास्त्र- 128 2

राजनीति विज्ञान - 256 1

दर्शनशास्त्र- 128 1

¨हदी- 128 -

अंग्रेजी- 128 1

संस्कृत- 128 --

उर्दू- 128 1

गृह विज्ञान-200 -

संगीत - 128 - कुल - 2374 11 यह सही है कि यहां शिक्षकों की कमी है। पर्याप्त शिक्षक रहते तो कक्षा लेने में परेशानी नहीं होती। सीमित संसाधनों के बावजूद हमलोग अपने स्तर से तमाम प्रयास करते हैं। पढ़ाई की गुणवत्ता पर ंभी ध्यान लगा रहता है। हां, सुरक्षा को लेकर चिंता है। सीसीटीवी की व्यवस्था की जा रही है।

डॉ. कुमारी शकुंतला

प्राचार्य, आरबीबीएम

Posted By: Jagran

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