मुजफ्फरपुर, [मुकेश कुमार 'अमन']। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र जैसा अत्यंत महत्व वाला विषय उपेक्षित है। समाज को गढऩे वाले विषय का ये हाल है। यह जानकर हैरानी हो सकती है। ये सच है मगर। यहां इस विषय की पढ़ाई के लिए गजब की बेफिक्री है। शायद यही वजह है कि विश्वविद्यालय की स्थापना से अब तक ध्यान नहीं दिया गया। महज दो कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो पाई। विश्वविद्यालय के अंतर्गत छह जिले आते हैं। उनमें 37 कॉलेजों में ये हाल है।

मुजफ्फरपुर में सिर्फ इस कॉलेज में होती पढ़ाई

 मुजफ्फरपुर के 15 कॉलेजों में इकलौते नीतीश्वर महाविद्यालय तो हाजीपुर में आरएन कॉलेज में इस विषय की पढ़ाई होती है। यूपीएससी के मेन सिलेबस में ये विषय शामिल हो चुका है। इससे विद्यार्थियों की दिलचस्पी और बढ़ी है। प्रशासनिक सेवा में जाने वाले छात्रों की प्राथमिकता समाजशास्त्र ही है। विश्व के सभी विकसित देशों में समाजशास्त्र की पढ़ाई होती है। तीन नए कॉलेज खुले हैं अब उनमें इस विषय की पढ़ाई होनी की बात कही गई है। मगर, पीजी के विद्यार्थियों को यहां भी निराशा ही हाथ लगेगी।

इस तरह समझें विषय की ऐसी अनदेखी

नीतीश्वर महाविद्यालय में  समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना सिन्हा कहती हैं कि उनके यहां कम से कम चार शिक्षक चाहिए। स्वीकृत पद हालांकि तीन ही है। दो सेवानिवृत्त हो गए। उनकी जगह एक शिक्षक हाल में बीपीएससी से बहाल होकर आए हैं। इस प्रकार विभागाध्यक्ष समेत दो शिक्षकों के भरोसे इंटरमीडिएट से स्नातकोत्तर (पीजी) तक पढ़ाई निर्भर है। पीजी में 68 व स्नातक में 44 विद्यार्थी हैं।

 आरएन कॉलेज में पढ़ाई शुरू होकर बंद हो गई थी। अब क्या हाल है कोई नहीं जानता। संबद्ध कॉलेजों में मुजफ्फरपुर में डॉ. जगन्नाथ मिश्रा महाविद्यालय और अन्य कॉलेजों में इसकी पढ़ाई होती है। विद्यार्थी उन्हीं कॉलेजों के भरोसे हैं। डॉ. रंजना का कहना है कि इस विषय को नजरअंदाज करना समाज के हित में नहीं है। यूपीएससी के लिए यह बहुत पुराना और पसंदीदा विषय है। इस विषय को इंजीनियर्स व आइआइटीयंस भी लेते हैं। 

समाजशास्त्र में एमफिल और पीएचडी भी

समाजशास्त्र एक ऐसा विषय है, जिसका सीधा संबंध सामाजिक सरोकारों से जुड़ा होता है। इसके माध्यम से आप एक पंथ दो काज कर सकते हैं। एक तो आपको रोजगार मिल जाएगा, दूसरा समाज से हमेशा जुड़े रहने और उसकी समस्याओं को दूर करने के अवसर भी आपको बराबर मिलते रहेंगे। इस विषय के प्रति पिछले एक दशक में लोगों का रुझान खूब बढ़ा है।

 समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी) में बैचलर तथा मास्टर डिग्री कोर्स मौजूद हैं। किसी भी स्ट्रीम से 12वीं करने वाले विद्यार्थी आगे इस विषय की पढ़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा समाजशास्त्र में एमफिल और पीएचडी भी की जा सकती है। इस विषय की पढ़ाई करके विद्यार्थी सोशियोलॉजिस्ट, कम्युनिटी ऑर्गेनाइजर, प्रोफेसर, लेक्चरर, कंसल्टेंट व काउंसलर बन सकते हैं। मगर, विश्वविद्यालय में इस विषय की घोर उपेक्षा से छात्र-छात्राओं समेत शिक्षक वर्ग भी काफी आहत हैं। दो कॉलेजों को छोड़कर अन्यत्र समाजशास्त्र विभाग ही नहीं है। 

Posted By: Murari Kumar

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