SKMCH में MBBS के तीसरे दौर के नामांकन में 81 छात्रों ने पक्की की सीट, बचीं केवल 10 सीटें
SKMCH Muzaffarpur MBBS Admission: श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (SKMCH) में एमबीबीएस सत्र 2026-27 के तीसरे दौर की काउंसलिंग में ...और पढ़ें

तीसरे दौर की काउंसलिंग के एसकेएमसीएच पहुंचे अभ्यर्थी।
केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। SKMCH MBBS Seats Bihar Combined Entrance: श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (SKMCH) में एमबीबीएस सत्र 2026-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया ने तेजी पकड़ ली है।
तीसरे दौर (थर्ड राउंड) की काउंसलिंग के पहले ही दिन कागजातों की गहन जांच के बाद 81 छात्रों ने अपना नामांकन पक्का कराया।
सुबह से ही काउंसलिंग हॉल और प्रशासनिक भवन परिसर में अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों का जमावड़ा लगा रहा।
कड़ी जांच के बाद मिला प्रवेश
नामांकन प्रभारी डॉ. मिलन के नेतृत्व में बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) से चयनित छात्रों का सबसे पहले बायोमेट्रिक मिलान किया गया।
इसके बाद शिक्षकों की समर्पित टीम ने 10वीं और 12वीं के मूल प्रमाण पत्र, नीट स्कोरकार्ड और अन्य अनिवार्य शैक्षणिक दस्तावेजों की गहन पड़ताल की।
सत्यापन प्रक्रिया में उत्तीर्ण होने के बाद प्राचार्य डॉ. कुमारी विभा ने सभी 81 अभ्यर्थियों के प्रवेश को अंतिम मंजूरी दी।
150 में से 140 सीटों पर दाखिला
प्राचार्य डॉ. कुमारी विभा ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की ओर से कॉलेज को कुल 150 सीटों की स्वीकृति प्राप्त है। विभिन्न कोटों के तहत वर्तमान सीट स्थिति इस प्रकार है:
स्टेट कोटा: कुल 123 सीटों में से 115 सीटों पर नामांकन पूरा हो चुका है, जबकि केवल 8 सीटें रिक्त बची हैं।
ऑल इंडिया कोटा: निर्धारित 23 सीटों के विरुद्ध 22 सीटों पर दाखिला संपन्न हो गया है और मात्र 1 सीट शेष है। सुरक्षित 4 सीटों में से 3 पर नामांकन हो चुका है और 1 सीट खाली है।
प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि सभी श्रेणियों के अंतर्गत शेष बची 10 सीटों पर दाखिला प्रक्रिया पूरी होते ही नए सत्र की नियमित कक्षाएं बिना किसी विलंब के शुरू कर दी जाएंगी।
हॉस्टल आवंटन और पठन-पाठन से जुड़ी सभी प्रशासनिक तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं।
सपना साकार होने पर झलकी खुशी
काउंसलिंग स्थल पर प्रवेश पत्र और सत्यापन पर्ची मिलते ही छात्रों और उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। दरभंगा के मोहित, जिन्होंने न्यूरोलॉजिस्ट बनकर ग्रामीण क्षेत्र के जरूरतमंदों की सेवा करने का संकल्प जताया, और पूर्णिया की श्रेया ने इस उपलब्धि को अपने कठिन परिश्रम का परिणाम बताया।
बेगूसराय से पहुंचे एक मजदूर पिता ने कहा कि वर्षों की मेहनत और त्याग आज बेटे के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के साथ सार्थक हो गया।
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