सीतामढ़ी {मुकेश कुमार 'अमन'} । गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के राजपथ पर इस बार भी बिहार की कोई झांकी दिखाई नहीं पड़ी। तर्क गणतंत्र दिवस समारोहों पर भी कोरोना का साया। मगर, सीतामढ़ी के लोगों को इस बात को लेकर तसल्ली और बेहद खुशी है कि जानकी जन्मस्थली पुनौराधाम की झांकी पटना गांधी मैदान में प्रदर्शित की गई। गांधी मैदान में आठ विभागों की झांकी में पर्यटन निदेशालय द्वारा पुनौराधाम सीतामढ़ी विषय पर झांकी आकर्षण का केंद्र रही।

माता सीता की महिमा व उनकी प्राकट्यस्थली से जुड़े होने के कारण इस झांकी को काफी सराहना मिली। हालांंकि, यह पुरस्कारों की कैटेगरी में नहीं आ सकी उसका मलाल भी लोगों को काफी है। मलाल लाजिमी है अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि को तवज्जो तो मिली मगर, सीतामढ़ी इस मामले में अभी तक उपेक्षित ही है। पटना में राज्यस्तरीय झांकी में पुनौराधाम को स्थान मिलने से फिर एकबार सीतामढ़ी ने सबका ध्यान बरबस अपनी ओर खींचा है। इस झांकी का विषय ही था-पुनौराधाम की महिमा है न्यारी यहीं अवतरित हुईं सीता जनक दुलारी।

अयोध्या में राममंदिर तो सीतामढ़ी में सीता मंदिर नहीं बनने का मलाल

अयोध्या में रामजन्मभूमि पर रामलाला का विशाल मंदिर तो बन रहा है लेकिन, सीतामढ़ी में सीता मंदिर का निर्माण कराने की सरकारी घोषणा अमल में नहीं आ सकी है। रामजन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के साथ ही सीतामढ़ी के जानकी जन्मस्थान पुनौराधाम के दिन भी बहुरने की उम्मीद लोग लगाए बैठे हैं।

पुनौरा धाम में भव्य सीता मंदिर का निर्माण आखिर कब शुरू होगा आमजनमानस के लिए यह बड़ा सवाल है। यह सिर्फ सीतामढ़ी के वासियों के लिए ही नहीं अपितु देश और दुनिया के असंख्या श्रद्धालुओं के लिए भी यक्ष प्रश्न है जहां जन-जन में जानकी और रोम-रोम में प्रभु श्रीराम बसे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पहल पर 'रामायण सर्किट योजना' के तहत माता सीता का भव्य मंदिर निर्माण की घोषणा की गई थी। मंदिर के लिए 48 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट तैयार रहने की बात भी कही गई। बिहार सरकार ने मंदिर निर्माण के लिए बीस एकड़ जमीन भी दी थी ताकि, पुनौधाम प्रांगण में भव्य मंदिर बन सके। रामायण सर्किट योजना के तहत हर मंजिल पर विभिन्न देवी देवताओं से जुड़ी सुंदर गैलरी के साथ-साथ परिसर को आधुनिक वास्तुशास्त्र के अनुसार सुसज्जित करने समेत न जाने और क्या-क्या दिलासा दिलाया गया। नतीजा 'ढाक के तीन पात...!'

Edited By: Dharmendra Kumar Singh