Shardiya Navratri 2026 : किसानों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रही हैं मां दुर्गा, गज पर आगमन की यह है मान्यता
शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो गया है, जिसमें मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे सुख-समृद्धि ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर के देवी मंदिर में पूर्जा-अर्चना के लिए जुटी भक्तों की भीड़। जागरण
HighLights
मां दुर्गा का आगमन हाथी पर, सुख-समृद्धि का प्रतीक।
विजयादशमी पर मुर्गे पर विदाई, कुछ मान्यताओं में अशुभ।
नौ दिनों तक होगी मां शैलपुत्री समेत नौ स्वरूपों की पूजा।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो गया। सुबह से ही घरों और मंदिरों में मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ भक्ति का माहौल बनने लगा।
नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु कलश स्थापना कर मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी यानी गज पर हो रहा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है। हालांकि, मां की विदाई की सवारी को लेकर भी धार्मिक मान्यताओं में विशेष चर्चा है।

गज पर आगमन से सुख-समृद्धि की मान्यता
धर्माचार्य के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है। देवी पुराण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में गज पर आगमन को सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और धन-धान्य में वृद्धि का संकेत माना जाता है। इसे किसानों के लिए भी शुभ फल की कामना से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना करेंगे।

मुर्गे पर विदाई की मान्यता
इस बार विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को पड़ रही है। धार्मिक पंचांग की मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार को मां दुर्गा का प्रस्थान मुर्गे यानी चरणायुध पर माना जाता है। इसे कुछ धार्मिक परंपराओं में शुभ नहीं माना गया है और अशांति या जन-धन की हानि जैसी आशंकाओं से जोड़ा जाता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं, भविष्य की घटनाओं की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

नौ दिनों तक होगी आराधना
नवरात्र के दौरान श्रद्धालु उपवास रखकर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे। घरों और मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और आरती के आयोजन होंगे। भक्त मां से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करेंगे।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धर्माचार्य पंडित रामजनम पांडेय ने बताया कि कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक शुभ मुहूर्त निर्धारित है।
श्रद्धालु इस अवधि में विधि-विधान से कलश स्थापना कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। नवरात्र के पहले दिन से ही देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।
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