RSS का बदलेगा सांगठनिक ढांचा, उत्तर बिहार में मोतिहारी और मुजफ्फरपुर समेत बनेंगे चार नए संभाग
RSS Bihar Reorganization: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) उत्तर बिहार में अपने सांगठनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है, ...और पढ़ें

आरएसएस के उत्तर बिहार प्रांत के अंतर्गत वर्तमान में 14 विभाग और 44 संगठन जिले हैं। फाइल फोटो
HighLights
उत्तर बिहार में चार नए सांगठनिक संभागों का गठन होगा।
प्रांत प्रचारक पद समाप्त, पूरे बिहार के लिए एक प्रदेश प्रचारक।
संगठन की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक मजबूत होगी, कार्य विस्तार।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। RSS Organizational Structure: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने सांगठनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। नए साल से संगठन की नई व्यवस्था दिखाई देने लगेगी।
इसके तहत उत्तर बिहार के सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा। उत्तर बिहार प्रांत के अंतर्गत वर्तमान में 14 विभाग और 44 संगठन जिले हैं।
चार नए संभाग बनेंगे
नई व्यवस्था में जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी और समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तर बिहार को चार सांगठनिक संभागों में बांटने की योजना है। मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और पूर्णिया को इन संभागों का केंद्र बनाया जाएगा।
पटना बनेगा मुख्य केंद्र
नई व्यवस्था में प्रांत प्रचारक का पद समाप्त करने की योजना है। इसके स्थान पर पूरे बिहार के लिए एक प्रदेश प्रचारक होगा। प्रदेश प्रचारक का मुख्य केंद्र पटना रहेगा।
सात संभागों का खाका
इसके साथ ही बिहार को कुल सात सांगठनिक संभागों में बांटने की योजना पर काम चल रहा है। उत्तर बिहार के चार संभागों के अलावा पटना, मुंगेर और गया को अन्य तीन संभागों का केंद्र बनाए जाने की तैयारी है।
एक बिहार प्रदेश संगठन
अभी बिहार में सांगठनिक दृष्टि से दो प्रांतीय केंद्र पटना (दक्षिण बिहार) और मुजफ्फरपुर (उत्तर बिहार) के रूप में काम करते हैं। नई व्यवस्था में दोनों प्रांतीय केंद्रों को मिलाकर पूरे बिहार के लिए एक मुख्य प्रदेश संगठन बनाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी प्रदेश प्रचारक संभालेंगे और उनका मुख्य केंद्र पटना होगा।
क्षेत्रीय ढांचा रहेगा यथावत
बिहार और झारखंड को मिलाकर बना संघ का क्षेत्रीय ढांचा यथावत रहेगा। क्षेत्र प्रचारक का पद भी पहले की तरह बना रहेगा। संघ की योजना करीब दो करोड़ की आबादी के अनुपात में एक सांगठनिक संभाग बनाने की है।
इससे बड़े क्षेत्र को छोटे और स्थानीय स्तर के कार्यक्षेत्र में बांटकर गतिविधियों की निगरानी और समन्वय किया जा सकेगा।
स्थानीय निगरानी होगी मजबूत
संभाग प्रचारकों के नीचे विभाग प्रचारक और जिला प्रचारक की मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह काम करती रहेगी। संभाग प्रचारकों का कार्यक्षेत्र प्रांत प्रचारकों की तुलना में छोटा और अधिक स्थानीय होगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों तक संगठन की गतिविधियों को गति देने और कार्यों के बेहतर समन्वय में मदद मिलने की उम्मीद है। विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना चन्नी कहते हैं कि सांगठनिक गतिविधियों में तेजी लाने और उत्तर बिहार के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक संघ के कार्यों का विस्तार करने के लिए नई योजना बनाई गई है।
दिसंबर में दिखेगा असर
दिसंबर में संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत के जिले में प्रवास के बाद संगठन का स्वरूप भी नए ढांचे में दिखाई देने लगेगा। इसकी कवायद चल रही है।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांगठनिक ढांचे में बदलाव का निर्णय मार्च 2026 में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में लिया गया था। उसके बाद अब निचले स्तर पर नए स्वरूप को लेकर कवायद तेज है।
