मुजफ्फरपुर, जासं। कोरोना काल में जिले के स्वास्थ्य केंद्रों व अस्पतालों में बड़ी संख्या कर्मियों की बहाली में बड़ी गड़बड़ी की गई है। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह की गई कि नियमों को ताक पर रख दिया गया। किसी प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया। इसके अलावा अन्य कई तरह की गड़बडिय़ां की गईं। डीएम प्रणव कुमार के आदेश पर गठित जांच टीम ने रविवार को संयुक्त रिपोर्ट सौंप दी है। बड़ी गड़बड़ी को देखते हुए उक्त बहाली को रद भी किया जा सकता है। वहीं कई लोगों पर कार्रवाई भी हो सकती है।

मालूम हो कि सरकार के आदेश पर चिकित्सक, एएनएम, पारा मेडिकल कर्मी, वार्ड ब्वाय आदि समेत लगभग 780 कर्मियों की बहाली की गई थी। इसमें गड़बड़ी की शिकायत के बाद डीएम ने जांच के आदेश दिए। पहले एडीएम राजेश कुमार के नेतृत्व में जांच टीम का गठन किया। इस मामले में बहाली के नामपर राशि लिए जाने का एक ऑडियो वायरल होने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। डीडीसी डॉ. सुनील कुमार झा के नेतृत्व में एक और तीन सदस्यीय टीम गठित की गई। जांच के बाद टीम ने संयुक्त रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। इसके अनुसार बहाली के जो प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी वह नहीं हुई।शिकायत में यह कहा गया था कि जिन लोगों की बहाली हुई उनकी योग्यता और प्रमाणपत्र शक के घेरे में है। माना जा रहा है कि जांच टीम ने बहाली में इस ङ्क्षबदु की अनदेखी की बात कही है। इस रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। हाल में ही कोरोना एंटीजन किट मामले में गड़बड़ी की पुष्टि जांच टीम ने की थी। अब बहाली में गड़बड़ी से इतना तय हो गया कि सिविल सर्जन कार्यालय से भ्रष्टाचार के तार जुड़े हैं। कई कर्मी वर्षों से यहां जमे हैं। इस तरह की गड़बड़ी में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है।  

Edited By: Ajit Kumar