मुजफ्फरपुर, जेएनएन। जिले में संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की निर्धारित मापदंडों के अनुपालन की अपील के बाद भी लोग सजग नहीं हो रहे हैं। वे मास्क की अनिवार्यता को भूल गए। शुरुआती दौर में तो लोग सतर्क नजर आए, लेकिन अनलॉक टू की शुरुआत के साथ ही बेपरवाह हो गए। भीड़ के बढ़ते दायरे के बीच शारीरिक दूरी का उल्लंघन और चेहरों से मास्क गायब होने से संक्रमण भी तेजी से बढ़ा। सरकारी दफ्तरों में कर्मियों के चेहरे पर तो मास्क रहते हैं, लेकिन बाहर निकलते ही उतर जाते है। इसी तरह शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, चौक-चौराहों व दुकान-बाजारों में बगैर मास्क के ही लोग नजर आते हैं।

रोज जुर्माना की कार्रवाई हो रही

बता दें कि लॉकडाउन के दौरान बगैर मास्क निकलने पर रोज जुर्माना की कार्रवाई हो रही थी। अनलॉक वन में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। लिहाजा लोग जान से खिलवाड़ करने लगे। हालांकि अनलॉक टू में जब जिला प्रशासन की तरफ से बगैर मास्क लगाए निकलने पर जुर्माना की कार्रवाई शुरू की गई तो फिर उन्हें मास्क की याद आई। अभी पचास फीसद लोग बगैर मास्क के ही घर से निकल रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में अधिकारी व कर्मचारी जरूर मास्क का उपयोग करते हैं। बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान में भी इसका पालन हो रहा है। लेकिन, कई मंडियों में लोग बगैर मास्क के नजर आ रहे हैं।

जुर्माना का डर बढ़ा रहा मास्क की डिमांड

जिले में मास्क का प्रतिदिन का कारोबार करीब 10 लाख रुपये का है। गांव-गांव तक महिलाएं कपड़े के मास्क बना रही हैं। शहर की दवा दुकान से सब्जी मंडी तक, चाय से पान की दुकान तक मास्क मिल जा रहे हैं। तीन महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो मास्क की बिक्री में इजाफा हुआ है। कारोबारी सुरेश प्रसाद बताते हैं कि जुर्माना के भय से इन दिनों मास्क की काफी मांग है।

अभियान अभी जारी रहेगा

जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क जरूरी है। यह सभी के लिए अनिवार्य है। मास्क नहीं पहनने व शारीरिक दूरी का अनुपालन नहीं करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। दुकानें सील की जा रही हैं। अभियान अभी जारी रहेगा।

 

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