यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 06, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अब मिथिला की कला-संस्कृति और दुर्लभ धरोहर देख सकेंगे लोग, हो चुकी है यह विशेष व्यवस्था
सीएम ने मिथिला ललित कला संग्रहालय एवं मिथिला चित्रकला संस्थान का आनलाइन किया उद्घाटन। वर्ष 1975 में सौराठ में स्थानीय ...और पढ़ें

मधुबनी, जासं। मैथिल ब्राह्मणों के विश्व प्रसिद्ध वैवाहिक निर्धारण स्थल सौराठ गांव में मिथिला ललित कला संग्रहालय एवं मिथिला चित्रकला संस्थान का उद्घाटन गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग से किया। अब यह संग्रहालय दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा। संग्रहालय में प्रवेश निशुल्क होगा। वर्ष 1975 में सौराठ में स्थानीय लोगों के सहयोग से मिथिला ललित संग्रहालय सह शोध संस्थान की स्थापना की गई थी। दो कमरों वाले इस संग्रहालय को वर्ष 1982 में कला संस्कृति एवं युवा विकास विभाग ने अधिग्रहित किया था। वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री ने संग्रहालय के नए भवन का शिलान्यास किया था। इस संग्रहालय के नए अत्याधुनिक भवन में मिथिला की ऐतिहासिक, धार्मिक स्थल के अलावा दुर्लभ प्रतिमाओं का दर्शन होगा। इसके लिए अलग-अलग गैलरी का निर्माण किया गया है। इसमें सामा-चकेवा, झिझिया, जट-जटिन जैसे पारंपरिक नृत्यशैली का दीदार लोग कर सकेंगे। संग्रहालय में लोकगीत, संगीत, विवाह, उपनयन और कृषि कार्य में उपयोग में लाई जानेवाली परंपरागत वस्तुओं को संरक्षित किया जाएगा।
पंजी-अभिलेखों का कराया जाएगा अनुवाद
मिथिला ललित संग्रहालय के पुराने भवन में प्राचीन पांडुलिपियां, मैथिल ब्राह्मणों की वैवाहिक पंजी, सिक्की कलाकृतियां, मधुबनी पेंटिंग, बांस व मिट्टी की कलाकृतियां व जूट से तैयार पाग सहित अन्य वस्तुएं थीं। इसके अलावा मैथिली में लिखा रामायण सहित सैकड़ों पुस्तकें हैं, जिसे लोग देख सकेंगे।
धरोहर संरक्षण को जागरूकता अभियान
संग्रहालय में देश के अलावा अमेरिका, जापान के संस्थानों में रखी गई दुर्लभ मधुबनी पेंङ्क्षटग को लाया जाएगा। इसके लिए जापान, अमेरिका में रह रहे मिथिला के लोगों की मदद ली जाएगी। संग्रहालयाध्यक्ष डा. शिवकुमार मिश्र ने बताया कि जिले में पंचायत स्तर पर धरोहर संरक्षण जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभियान से प्राप्त मिथिला की दुर्लभ वस्तुओं को संग्रहालय में रखा जाएगा।
