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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 22, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मुजफ्फरपुर जिले के गरहां व चक्की सोहागपुर में बनेगा नक्सल थाना भवन

By Ajit KumarEdited By:
Published: Mon, 22 Nov 2021 09:40 AM (IST)

पारू थाना के पश्चिमी दियारा स्थित चक्की सोहागपुर गांव व आसपास का क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है। गंडक किनारे स्थित ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन पर स्थित है गरहां व पश्चिमी दियारा के पारू में चक्की सोहागपुर।
मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन पर स्थित है गरहां व पश्चिमी दियारा के पारू में चक्की सोहागपुर।

मुजफ्फरपुर, जासं। जिले के बोचहां थाना के गरहां में व पारू थाना के चक्की सोहागपुर में नक्सल थाना भवन बनेगा। यह भवन जी प्लस टू स्ट्रक्चर का होगा। इसके लिए 7.67 करोड़ रुपये के प्राक्कलन की स्वीकृति मिली है। इस राशि से थाना का आधारभूत संरचना व उपस्करों का निर्माण किया जाएगा। बाद गृह विभाग ने इस राशि के आवंटन का आदेश जारी किया है। दोनों क्षेत्र नक्सली मामले को लेकर काफी संवेदनशील माना जाता है। 

दरभंगा फोरलेन पर गरहां व पश्चिमी दियारा में है चक्की सोहागपुर

बोचहां थाना का गरहां गांव मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन पर स्थित है। यहां कई बार नक्सली घटनाएं घट चुकी है। लेवी नहीं देने पर एक पेट्रोल पंप पर हमला किया गया। इस क्षेत्र में नक्सलियों की सक्रियता रही है। यह क्षेत्र शहर के काफी करीब है। पारू थाना के पश्चिमी दियारा स्थित चक्की सोहागपुर गांव व आसपास का क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है। गंडक किनारे स्थित क्षेत्र आवागमन की दृष्टि से काफी दुरुह माना जाता है। जिला मुख्यालय से इसकी दूरी लगभग 50 किमी है। दियारा क्षेत्र नक्सलियों की शरणस्थली मानी जाती है। दियारा में नक्सलियों ने अपना प्रशिक्षण कैंप बना रखा था। चक्की सोहागपुर व आसपास के क्षेत्र में कई नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया गया। इस क्षेत्र में कई बार पुलिस व नक्सलियों से मूठभेड़ भी हुई। नक्सलियों की नकेल कसने के लिए विशेष नक्सल थाना भवन की मांग की जा रही थी। इन थाना भवनों के बन जाने से दोनों क्षेत्रों में जल्द से जल्द नक्सलियों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।  

बिना ढके ट्रैक्टर से हो रही मिट्टी की ढुलाई

जासं, मुजफ्फरपुर : बिना ढके ट्रैक्टर से शहर में विभिन्न मोहल्लों से होकर इन दिनों धड़ल्ले से मिट्टी ढुलाई की जारी है। धूल के साथ मिट्टी उडऩे के कारण मुख्य सड़क से लेकर मोहल्लों तक में धूल की मोटी परतें जम गई हैं। हालांकि धूल को शांत करने के लिए दुकानदार सड़क पर पानी फेंक रहे हैं, लेकिन पानी सूखने के बाद फिर धूल उडऩे लगती है। बेला-रोहुआ में प्रतिदिन करीब 500 ट्रैक्टरों से मिट्टी लेकर आना-जाना होता है। प्रशासन के जिम्मेवार लोग इसे रोकटोक नहीं करते न ही इन लोगों पर किसी तरह की कार्रवाई हो रही। धूल के डर से सुबह में लोगों ने टहलना छोड़ दिया है। बेला आरके आश्रम मोहल्ला निवासी मृत्युंजय मिश्रा, राजू कुमार, अभिषेक द्विवेदी आदि ने कहा कि धूल के डर से बाजार जाना मुश्किल हो गया है। घर की खिड़कियों को बंद करके रखना पड़ रहा है। किचेन में धूल आकर भोजन का जायका खराब कर रहा।