बिहार में प्रधान शिक्षकों के वेतन निर्धारण पर हस्ताक्षर का पेच, मुजफ्फरपुर में फंसा मामला
Pradhan Shikshak Pay Fixation: मुजफ्फरपुर में प्रधान शिक्षकों के वेतन निर्धारण में हस्ताक्षर का पेच फंस गया है, जिससे प्रक्रिया ...और पढ़ें

डीपीओ ने प्रखंडों के लेखापाल-सह-डाटा एंट्री ऑपरेटरों को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के हस्ताक्षर कराने की जिम्मेदारी दी है।
HighLights
प्रधान शिक्षकों के वेतन निर्धारण में हस्ताक्षर का मामला फंसा।
11 प्रखंडों में बीडीओ के पास बीईओ प्रभार, हस्ताक्षर की चुनौती।
एमएलसी चुनाव ड्यूटी से लेखापालों की मुश्किलें बढ़ीं, देरी की आशंका।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar Teacher Salary Fixation: बिहार में प्रधान शिक्षकों को वेतन संरक्षण का लाभ देने के लिए आयोजित वेतन निर्धारण कैंप के बाद अब सेवापुस्तिका और वेतन निर्धारण प्रपत्र पर हस्ताक्षर का मामला पेच में फंस गया है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने प्रखंडों के लेखापाल-सह-डाटा एंट्री ऑपरेटरों को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के हस्ताक्षर कराने की जिम्मेदारी दी है।
जिले के 11 प्रखंडों में बीईओ का प्रभार प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के पास होने से लेखापालों के सामने बीडीओ से हस्ताक्षर कराने की बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।
डीईओ ने जताई अनभिज्ञता
मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कुमार अरविंद सिन्हा ने बताया कि डीपीओ स्थापना द्वारा इस तरह का पत्र जारी किए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्र सीधे बीडीओ सह बीईओ के नाम से जारी होना चाहिए, क्योंकि यह पूरी तरह तकनीकी प्रक्रिया है।
संबंधित अधिकारी के नाम से आदेश जारी होने पर ही वे सेवा पुस्तिका और वेतन निर्धारण प्रपत्र का सत्यापन कर हस्ताक्षर कर सकेंगे।
जांच में खुली पोल
गत 22 से 26 सितंबर तक आयोजित वेतन निर्धारण कैंप के दौरान प्रपत्रों की जांच में पाया गया कि कई दस्तावेजों पर संबंधित बीईओ के हस्ताक्षर ही नहीं हैं।
इसके बाद औराई, गायघाट, सकरा, मुरौल, बंदरा, कुढ़नी, सरैया, पारू, साहेबगंज, कांटी और मुशहरी के लेखापालों को पत्र भेजकर 24 घंटे के भीतर हस्ताक्षर कराकर दस्तावेज जमा करने का सख्त निर्देश दिया गया।
BDO को नहीं मिली जानकारी
लेखापालों का कहना है कि जिन प्रखंडों में बीईओ का प्रभार बीडीओ संभाल रहे हैं, वहां बीडीओ को विभागीय आदेश की अलग से कोई सूचना नहीं मिली है।
ऐसे में बिना आधिकारिक आदेश के बीडीओ द्वारा सेवापुस्तिका का सत्यापन कर हस्ताक्षर करना आसान नहीं होगा। इससे वेतन संरक्षण प्रपत्रों के सत्यापन में अनावश्यक देरी होने और समय सीमा में काम पूरा न होने की आशंका बन गई है।
चुनाव ड्यूटी से बढ़ी मुश्किल
समस्या यह भी है कि जिले के कई प्रखंडों के लेखापाल-सह-डाटा एंट्री ऑपरेटरों की ड्यूटी आगामी एमएलसी चुनाव में लगा दी गई है।
ऐसे में चुनाव ड्यूटी के साथ-साथ निर्धारित 24 घंटे के भीतर बीईओ से हस्ताक्षर कराकर दस्तावेजों को जिला कार्यालय में जमा करना लेखापालों के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
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