बिहार में हल्दी-धनिया के डिब्बों और बेड के नीचे छिपाए थे लाखों रुपये, सिपाही बेबी कुमारी को 5 साल की जेल
मुजफ्फरपुर पुलिस वेतन घोटाले में महिला सिपाही बेबी कुमारी को विशेष निगरानी कोर्ट ने पांच साल कठोर कारावास और 16.25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर जिला बल के पुलिसकर्मियों के वेतन, एसीपी व एरियर के सात करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के 16 साल पुराने चर्चित मामले में विशेष निगरानी कोर्ट-दो (उत्तर बिहार) के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने बड़ा फैसला सुनाया है।
अदालत ने गत पांच अक्टूबर को बेगूसराय जिले के नगर थाने के रघुवर नगर राधा निवासी आरोपित महिला सिपाही बेबी कुमारी को दोषी करार दिया था।
सोमवार को अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए उसे पांच वर्ष कठोर कारावास व 16.25 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विशेष लोक अभियोजक (निगरानी) कृष्णदेव साह ने 11 गवाहों की गवाही कराई। विवेचक ने 21 सितंबर 2012 को आरोप-पत्र दाखिल किया था।
विशेष लोक अभियोजक ने बताया एक अक्टूबर 2010 को तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर ने नगर थाने में प्राथमिकी कराई थी। 2006 से 2010 के बीच अंजाम दिए गए इस घोटाले में एसएसपी कार्यालय के तत्कालीन एकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी की मुख्य भूमिका थी।
सुशील अधिकारियों के दस्तखत के बाद बैंक के बाहरी कर्मी से वेतन बिल की सीडी बनवाते समय पुलिसकर्मियों के नाम तो सही रखता, लेकिन खाता संख्या अपने लोगों से बदल देता था।
सुशील इस हेरफेर से पत्नी अनिता चौधरी, पुत्री, महिला सिपाही शकुंतला कुमारी व बेबी कुमारी के खातों में पैसे ट्रांसफर करवाता था। 13 फरवरी 1997 को बेबी के पति की इन्काउंटर में मौत हो गई थी। उसके पति सिपाही थे।
सुशील के रहन-सहन व रुपयों की अधिकता की बैंक मैनेजर को सूचना मिली तो जांच कर गोपनीय पत्र से एसएसपी को आगाह किया था।
मामला खुलने के बाद हुई छापेमारी में पुलिस को आरोपितों के घरों में बेड के नीचे और रसोईघर में हल्दी व धनिया के डिब्बों तक में छिपाकर रखे गए लाखों रुपये मिले थे। आरोपित प्रतिदिन एटीएम से नकदी निकाल घरों में छिपाते थे।
छापेमारी के दौरान शकुंतला के घर से 53 लाख, बेबी के घर से 2.40 लाख व सुशील के पास से 84 लाख रुपये समेत भारी मात्रा में जेवरात व जमीन-निवेश के कागजात जब्त किए गए थे।
बाद में कोर्ट के आदेश पर छह मार्च 2012 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जांच संभाली तो उजागर हुआ कि बेबी के खाते में 17 लाख, जबकि सुशील व शकुंतला के खातों में तीन-तीन करोड़ रुपये समेत सात करोड़ रुपये भेजे गए थे। मुख्य आरोपित सुशील, उसकी पत्नी व महिला सिपाही शकुंतला पर अलग-अलग सेशन ट्रायल चल रहा है।
