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बिहार में 14 लाख मछुआरों से 14 करोड़ वसूली, काफेड के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

By Prem Shankar MishraEdited By: Dharmendra Singh
Published: Thu, 01 Oct 2026 07:45 AM (IST)

Bihar fishermen scam : बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ लिमिटेड (काफेड) बनाकर मछुआरों के साथ करोड़ों का घोटाला सामने आया ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. काफेड बनाकर 14 लाख मछुआरों से 14 करोड़ की अवैध वसूली।

  2. प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने फर्जी दस्तावेजों से कराया निबंधन।

  3. मत्स्य विभाग ने काफेड से सहयोग न करने का निर्देश दिया।

प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर। राज्य में मछुआरों के लिए अवैध रूप से बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ लिमिटेड (काफेड) बनाकर करोड़ों का घपला किया गया है। तथ्यों को छुपाकर और भ्रामक दस्तावेज के आधार पर संघ का निबंधन करा इसके प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने यह बड़ा खेल किया है।

काफेड की संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए डेरी, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग गंभीर हुआ है। इस संघ से आगे किसी तरह की भागदारी या सहयोग नहीं करने को लेकर राज्य के मत्स्य निदेशक ने मत्स्य पालन एवं इससे जुड़ी संस्थाओं को पत्र भेजा है।

विभिन्न जांच रिपोर्टों एवं पटना हाई कोर्ट के आदेश के आधार पर मत्स्य निदेशक ने 28 सितंबर को पत्र जारी किया है। इसमें काफेड की कार्यप्रणाली और उद्देश्य को भ्रामक, अनधिकृत और दंडात्मक श्रेणी का माना है।

निबंधन की प्रक्रिया के समय इस तथ्य को छिपाया गया कि बिहार स्वावलंबी सहकारी समिति अधिकरण ने 15 नवंबर 2021 को ही कानूनन विघटित कर दिया था। पटना हाई कोर्ट ने भी 2017 के आदेश में कहा था कि इसके पास नियमत: एक भी वैध प्राथमिक समिति सदस्य के रूप में शामिल नहीं है।

ऋषिकेश कश्यप ने 50 सदस्य समितियों का झूठा दावा किया। कानूनन मृत संस्थाओं को भ्रामक चार्टर्ड एकाउंटेंट की रिपोर्ट के आधार पर जीवित दिखाकर मल्टी स्टेट के तहत अपग्रेड कराते हुए केंद्रीय प्राधिकरण को गुमराह किया।

सरकारी लोगो का उपयोग कर मछुआरों का आर्थिक शोषण

काफेड ने बिना किसी अधिकार के बिहार सरकार के आधिकारिक लोगो का दुरुपयोग किया। इसके माध्यम से लगभग 14 लाख गरीब मछुआरों को भ्रमित कर कामगार एवं शिल्पकार फिशरीज कार्ड जारी कर सौ-सौ रुपये की वसूली की। यह राशि लगभग 14 करोड़ है। इसकी जांच आर्थिक अपराध इकाई भी कर रही है।

जांच में यह बात भी सामने आई है कि ऋषिकेश कश्यप ने राष्ट्रीय महासंघ के नाम का भी दुरुपयोग किया। बिहार स्टेट कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड में अवैध रूप से बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के नाम से खाता खुलवाया। फर्जी वेबसाइट भी बनाई। खुद को इसका प्रबंध निदेशक बताते हुए वित्तीय हेराफेरी का प्रयास किया।

जाली बिल पर अनुदान

राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी), हैदराबाद द्वारा पटना और मधुबनी में स्वीकृत एक्वा वन सेंटर्स के नाम से वित्तीय अनुदान के लिए भी काफेड ने फर्जीवाड़ा का सहारा लिया। संदिग्ध और जाली बिल दिए गए। इस मामले की जांच अब केंद्रीय स्तर पर चल रही है।

बड़े वित्तीय घोटाले की पृष्ठभूमि तैयार करने का अंदेशा

मूलरूप से दरभंगा निवासी ऋषिकेश कश्यप द्वारा भविष्य में बड़े वित्तीय घोटाले की पृष्ठभूमि तैयार किए जाने को लेकर भी मत्स्य निदेशक ने अंदेशा जताया है। समानांतर नोड एजेंसी बनकर कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) आवंटन और पोर्टल पंजीकरण के नाम पर ऐसा किया जा रहा है। इससे केंद्र सरकार से मिलने वाले विभिन्न लाभों के नाम पर भ्रम में रख यह घोटाला किया जा सकता है।

  • बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ लिमिटेड बनाकर करोड़ों का घपला
  • तथ्य छिपा कराया काफेड का निबंधन, विभाग से रद होने पर भ्रामक दस्तावेज पर मल्टी स्टेट के तहत फिर कराया रजिस्ट्रेशन
  • 14 लाख से अधिक मछुआरों से सदस्यता के नाम पर सौ-सौ रुपये लेकर की गई 14 करोड़ की अवैध वसूली
  • प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने राष्ट्रीय महासंघ के नाम का दुरुपयोग कर खाता खोला, फर्जी वेबसाइट भी बनाई
  • निदेशक मत्स्य ने पत्र भेज इससे जुड़ी संस्थाओं को फर्जीवाड़ा से कराया अवगत, आगे से सहयोग नहीं करने का आग्रह

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