मछली पालकों को केसीसी का इंतजार, दरभंगा में 570 आवेदन के बाद भी एक को नहीं मिला ऋण
दरभंगा में बैंकों की उदासीनता के कारण मछली पालक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण नहीं मिल पा रहा ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
दरभंगा में 570 मछली पालकों के केसीसी आवेदन लंबित।
बैंक एनपीए बढ़ने के डर से ऋण देने से कतरा रहे।
मछली पालकों को केसीसी पर ब्याज सब्सिडी का लाभ।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। बैंक की उदासीनता के कारण मछली पालक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण नहीं मिल पर रहा हैं। बैंकों को डर है कि यह मछुआरा कर्ज माफी की उम्मीद में ऋण नहीं चुकाएंगे, जिससे उनका एनपीए बढ़ सकता है।
मछुआरा नाव, जाल या नाव की मरम्मत जैसी विभिन्न जरूरतों के लिए ऋण चाहते हैं। बैंकों और विभाग ने विभिन्न जरूरतों के लिए ऋण राशि तय की है, यथा नावों के लिए कार्यशील पूंजी 60 हजार और निवेश राशि एक लाख तक हो सकती है।
केसीसी योजना का उद्देश्य मछुआरा किसानों को उनकी उत्पादन और निवेश आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समय पर और पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराना है। ऋण की राशि की मंजूरी कितनी हो, यह बैक पर निर्भर है।
बताया जाता है कि किसानों को 60 हजार से तीन लाख तक ऋण देने का प्रावधान है। मत्स्य विभाग के रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर अब तक केसीसी ऋण प्राप्त करने के लिए 570 मछली पालक किसानों ने आवेदन किया है। लेकिन, अब तक किसी भी किसानों को केसीसी ऋण की स्वीकृति नहीं मिली है।
जिले में लगभग दस हजार मछली पालक किसान हैं। तालाब की बात करें तो लगभग 12 हजार तालाब है। जिनमें 2409 सरकारी तालाब है। जिसका कुल रकवा 9244 हेक्टेयर है।
जिले में प्रत्येक वर्ष लगभग 90 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। सरकार मछली पालकों को आत्म निर्भर बनाने के लिए कई प्रकार की योजना चला रखी है।
बैंक हमेशा मत्स्य पालन को जोखिम भरा मानते हैं या दस्तावेजीकरण में दिक्कत करते हैं, जिससे किसान लोन से वंचित रह जाते हैं। जीविका के माध्यम से मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जीविका के साथ जुड़कर समूह के जरिए ऋण प्राप्त किया जा सकता है। जिसमें केसीसी के तहत ब्याज सब्सिडी दो प्रतिशत की छूट और तीन प्रतिशत प्रोत्साहन भी शामिल है। उसी के तहत किसानों को सस्ती ब्याज दर पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन, बैंक इस ओर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
केसीसी ऋण को लेकर किसानों से पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर जागरूक किया जाता है। आवेदन सृजन कराने के लिए क्षेत्रीय पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। वर्ष 2022-2023 से अब तक केसीसी के लिए 570 आवेदन प्राप्त हुआ है। जिसे विभिन्न बैंकों को भेजा गया है। अभी तक किसी किसान को लाभ नहीं मिल पाया है।
--प्रदीप कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, दरभंगामछली पालक किसान खेती भी करते हैं। जिस आधार पर वे पहले ही केसीसी ऋण ले चूके है। ऐसे किसानों को फिर से ऋण नहीं मिल पाता है। कई किसान केसीसी ऋण लेने के बावजूद सही समय पर ऋण नहीं जमा कर पाते है। जिसके कारण उनका सिविल स्कोर कम रहता है। इसके कारण भी बैक ऋण देने से कतराती है।
--मनोज कुमार, अग्रणी बैंक प्रबंधक, दरभंगा
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