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कांटी की पूर्व सीओ ने गलत नीयत से की थी कृषि विभाग की जमीन की जमाबंदी, अपर समाहर्ता ने भेजी रिपोर्ट

Published: Sat, 19 Sep 2026 01:12 PM (IST)

DM Inquiry Report: मुजफ्फरपुर के कांटी में कृषि विभाग की जमीन की जमाबंदी गलत नीयत से करने के मामले में ...और पढ़ें

अपर समाहर्ता प्रशांत कुमार ने मामले की जांच रिपोर्ट विभाग को भेज दी है।

अपर समाहर्ता प्रशांत कुमार ने मामले की जांच रिपोर्ट विभाग को भेज दी है।

HighLights

  1. कांटी की पूर्व सीओ रिशिका कुमारी जमीन घोटाले में दोषी पाई गईं।

  2. कृषि विभाग की 44 डिसमिल जमीन निजी रैयतों को दी गई।

  3. अपर समाहर्ता की जांच रिपोर्ट में गलत नीयत उजागर हुई।

प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Land Scam: कांटी स्थित कृषि विभाग की करोड़ों की जमीन की जमाबंदी अंचल की तत्कालीन अंचलाधिकारी रिशिका कुमारी ने जान बूझकर गलत नीयत से की थी।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आदेश पर की गई जांच में रिशिका को दोषी पाया गया है। अपर समाहर्ता प्रशांत कुमार ने मामले की जांच रिपोर्ट विभाग को भेज दी है।

अंचल अमीन भी दोषी

इसमें तत्कालीन अंचल अमीन अंजली कुमारी को भी गलत रिपोर्ट देने का दोषी बताया गया है। इस रिपोर्ट के बाद रिशिका कुमारी पर सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल वह निलंबित हैं।

विदित हो कि कांटी अंचल स्थित कई खेसरा की जमीन कृषि विभाग (बीज विस्तार प्रदेश, बिहार सरकार) के नाम से दर्ज है। इनमें से 44 डिसमिल जमीन की जमाबंदी निजी रैयत के नाम से कर दी गई।

निलंबन की कार्रवाई

दैनिक जागरण ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद रिशिका कुमारी को निलंबित करते हुए तिरहुत के प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय को मुख्यालय निर्धारित किया गया।

साथ ही विभागीय कार्यवाही चलाई गई। संचालन पदाधिकारी अपर समाहर्ता को बनाया गया।

दिखाया दूसरे का कब्जा

अपर समाहर्ता ने रिपोर्ट में लिखा है कि रैयत की ओर से दाखिल-खारिज आवेदन के पश्चात राजस्व कर्मचारी तथा राजस्व अधिकारी ने सही प्रतिवेदन दिया गया कि उक्त भूमि कृषि विभाग, बिहार सरकार की है।

वर्तमान में इस पर गेहूं की फसल लगी हुई है। इस पर आवेदक का दखल-कब्जा भी नहीं है। अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर पश्चिमी के द्वारा भी विभाग की तरफ से आपत्ति दर्ज कराई गई।

तैयार की गलत रिपोर्ट

दूसरी ओर तत्कालीन अंचल अधिकारी, कांटी ने अंचल अमीन अंजली कुमारी से उक्त भूमि पर दखल कब्जा से संबंधित रिपोर्ट की मांग की। अंचल अमीन ने भी इस मामले में गलत रिपोर्ट तैयार की।

यह इसलिए कि दिनांक 17 जनवरी 2025 को राजस्व कर्मचारी ने रिपोर्ट दी थी कि उक्त भूमि पर गेहूं की फसल लगी हुई है। क्रेता का दखल कब्जा भी नहीं है।

यही बातें अनुमण्डल कृषि पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर पश्चिमी ने भी आपत्ति आवेदन में कही गई थी। अंचल अमीन ने पूरे मामले में गलत रिपोर्ट दी।

बताया कि भूमि खाली व परती के रूप में है। इस पर दीपक कुमार, पिता किशोरी राय एवं गौरव कुमार, पिता-राजकिशोर चौधरी का दखल कब्जा है।

कापी में संबंधित खेसरा नहीं

अपर समाहर्ता ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि सरकारी कर्मी एवं पदाधिकारियों का प्रथम दायित्व यह होता है कि किसी भी परिस्थिति में सरकारी भूमि की रक्षा की जाए।

इस मामले में तत्कालीन अंचल अधिकारी, कांटी रिशिका कुमारी द्वारा गलत मंशा से सरकारी भूमि का दाखिल खारिज कर दिया गया। उनके द्वारा प्रस्तुत आनलाइन खतियान की कापी में खेसरा संख्या 10324 दर्ज नहीं है।

दूसरी ओर आफलाइन खतियान में बीज विस्तार प्रदेश बिहार सरकार के साथ खाता संख्या-2286, खेसरा संख्या 10324, 10325, 10326, 10355, 10356 तथा 10357 कुल छह खेसरा दर्ज है।

इससे यह स्पष्ट है कि तत्कालीन अंचल अधिकारी, कांटी के द्वारा उक्त भूमि का दाखिल-खारिज सोच-समझकर गलत नीयत से की गई कार्रवाई है।

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