Muzaffarpur News : 47 साल से जिस जमीन पर था कब्जा, उसी के दाखिल-खारिज में खेल, 4 पर FIR के आदेश
Court Orders FIR : मुजफ्फरपुर में 47 साल से कब्जे वाली जमीन के एक हिस्से का धोखाधड़ी से दाखिल-खारिज कर ...और पढ़ें

Muzaffarpur Land Dispute : इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Land Mutation Fraud : बिहार के मुजफ्फरपुर में जिस जमीन को 47 साल पहले केवाला के जरिए खरीदा, जिस पर लगातार कब्जा रहा और जिसका नियमित लगान भी चुकाते रहे, उसी जमीन के एक हिस्से पर दूसरे के नाम दाखिल-खारिज होने का आरोप लगा है।
मुजफ्फरपुर के धर्मपुर निवासी 72 वर्षीय भोला साह को इसका पता तब चला, जब वे लगान जमा करने अंचल कार्यालय पहुंचे। मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सदर थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इस मामले में मुशहरी के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) समेत चार लोगों पर आरोप लगाए गए हैं।
लगान जमा करने पहुंचे तो हुआ पर्दाफाश
परिवादी भोला साह के अनुसार, उन्होंने 12 जनवरी 1979 को केवाला के माध्यम से धर्मपुर में 1.26 एकड़ जमीन खरीदी थी। तब से जमीन पर उनका दखल-कब्जा है।
वे नियमित रूप से बिहार सरकार को लगान भी चुकाते रहे हैं। आरोप है कि 26 फरवरी 2026 को लगान जमा करने अंचल कार्यालय पहुंचने पर उन्हें जमीन के एक हिस्से के दाखिल-खारिज की जानकारी मिली।
41 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज पर सवाल
भोला साह ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन में से 41 डिसमिल हिस्से का दाखिल-खारिज उनके भाई महेश्वर साह के नाम कर दिया गया।
इसमें मुशहरी के तत्कालीन सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला, राजस्व अधिकारी करुण करण और राजस्व अधिकारी विकास कुमार की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। परिवादी का दावा है कि बिना नोटिस या आम सूचना के कथित तौर पर मोटी रकम लेकर यह कार्रवाई की गई।
प्रतिवेदन नहीं मिलने पर कोर्ट सख्त
दो मार्च 2026 को दाखिल परिवाद की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अपर समाहर्ता (एडीएम) से पूरे मामले पर प्रतिवेदन मांगा था। संबंधित अधिकारियों को स्मार पत्र भेजकर कारण-पृच्छा भी की गई थी। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रतिवेदन नहीं मिलने पर सीजेएम कोर्ट ने सदर थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
