मुजफ्फरपुर में जीविका से ठगी मामले में SDM का आदेश, बैंक प्रतिनिधि कैंप लगाकर दें लोन की जानकारी
मुजफ्फरपुर में 100 से अधिक जीविका दीदियों से साढ़े तीन करोड़ रुपये की ठगी के मामले में एसडीएम कोर्ट में ...और पढ़ें

दीदियों ने अपने नाम पर लिए गए लोन की पूरी राशि ब्याज समेत माफ करने की पुरजोर मांग की।
HighLights
100 से अधिक जीविका दीदियों से साढ़े तीन करोड़ की ठगी।
एसडीएम ने बैंकों को विशेष शिविर लगाने का निर्देश दिया।
ठगी की शिकार दीदियों ने ब्याज सहित लोन माफी की मांग की।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Jivika Didi Fraud Muzaffarpur: जिले के बोचहां और मुशहरी प्रखंड की 100 से अधिक जीविका दीदियों से लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की ठगी मामले में बुधवार को एसडीएम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई।
इस सुनवाई में पीड़ित जीविका दीदियों के साथ बैंक प्रतिनिधि और जिला परियोजना प्रबंधक अनीशा भी उपस्थित रहीं। दीदियों ने अपने नाम पर लिए गए लोन की पूरी राशि ब्याज समेत माफ करने की पुरजोर मांग की।
लगाया जाएगा विशेष शिविर
एसडीएम पूर्वी आनंद उत्सव ने बैंक प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि तीन से पांच अक्टूबर तक बोचहां और मुशहरी के सीएलएफ पर विशेष शिविर लगाया जाए।
इस शिविर में दीदियों को उनके नाम पर बकाया लोन की सटीक जानकारी दी जाएगी। एसडीएम ने कहा कि दीदियों के बीच लोन की वास्तविक राशि को लेकर भ्रम बना हुआ है जिसे दूर करना बेहद आवश्यक है।
अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
अदालत ने बैंक को अगली सुनवाई आठ अक्टूबर से पहले शिविर लगाने का काम पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के दो निदेशकों और पांच अपर निदेशकों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। आरोपितों में आशुतोष की बहन शिवानी भी निदेशक के पद पर शामिल है।
साढ़े तीन लाख का पर्सनल लोन
सुनवाई के दौरान पीड़ित गीता देवी और संगीता देवी ने बताया कि उनके नाम पर साढ़े तीन-साढ़े तीन लाख रुपये का व्यक्तिगत लोन लिया गया था।
यह राशि अब ब्याज जुड़कर साढ़े पांच लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। दीदियों ने स्पष्ट किया कि वे इस बड़ी रकम को चुकता करने में पूरी तरह असमर्थ हैं क्योंकि उनके साथ छल किया गया है।
लखपति बनाने का दिया झांसा
जक्ष एग्रो ग्रेविटी एंड एनर्जी कंपनी के अपर निदेशक आशुतोष मंगलम ने दीदियों को लखपति बनाने का लालच देकर चेक पर हस्ताक्षर कराए थे।
इसके बाद लोन की पूरी राशि सीधे अपने खाते में ट्रांसफर करा ली थी। आरोपी ने कागजों पर मशरूम हट बनाने और 28 से 32 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने का वादा किया था लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी कोई काम नहीं हुआ।
