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सादे कागज पर अंगूठा-दस्तखत और बैंक से करोड़ों का लोन, मुजफ्फरपुर में जीविका दीदियां कर्जदार

Published: Mon, 21 Sep 2026 12:37 PM (IST)

मुजफ्फरपुर में जीविका दीदियों के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी ऋण घोटाला सामने आया है, जिसमें मौखिक आदेश पर ...और पढ़ें

इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. जीविका दीदियों के नाम पर करोड़ों का फर्जी ऋण।

  2. मौखिक आदेश पर कंपनी को दिया गया करोड़ों का काम।

  3. प्रशासनिक अधिकारियों और जीविका पदाधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । ऐसे मामले भी आते हैं जब सही दस्तावेज, वास्तविक पात्र होते हुए भी बैंकों से ऋण नहीं मिल पाते।

ऐसा भी होता है कि बैंकों और उद्योग विभाग के चक्कर काटते-काटते किसी तरह ऋण मुहैया होता है। दूसरी ओर फर्जी तरीके से चल रही कंपनी को लाख-दो लाख नहीं, करोड़ों रुपये दे दिए जाते हैं।

वह भी बिना किसी लिखित आदेश के और सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी को दाव पर रखकर। ऐसा ही जिले में हुआ।

मुशहरी और बोचहां प्रखंडों की सौ से अधिक जीविका दीदियों के ऋण की राशि जक्ष ग्रेविटी एग्रो एनर्जी को सीधे बैंक से भेज दिया गया। लखपति बनने का सपना देखने वाली दीदियां आज कर्ज में डूब गई हैं, वह भी उस राशि के लिए जो मिला ही नहीं।

दीदियों के आंदोलन पर उतरने के बाद मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है उसमें जिले के तत्कालीन वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी से लेकर जीविका के पदाधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आने लगी है।

बोचहां और मुशहरी में जिस जक्ष ग्रेविटी एग्रो एनर्जी कंपनी को मशरूम हट बनाने की जवाबदेही दी गई थी, वह आदेश मौखिक था।

लिखित रूप से इस कंपनी को कोई काम नहीं दिया गया था। जीविका डीपीएम ने जो जवाब एसडीओ पूर्वी को सौंपा है, उसमें इसका जिक्र किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जक्ष एग्रो ग्रेविटी एंड एनर्जी कंपनी को तकनीकी सहयोग करने के लिए मौखिक आदेश दिया गया था।

कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रशासनिक महकमा तक इसमें शामिल हो गया था। इसका परिणाम हुआ कि कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम ने करीब साढ़े तीन करोड़ का लोन दीदियों के नाम पर उठाया और धरातल पर कोई काम नहीं किया।

मंगलम की गिरफ्तारी के बाद और भी चौंकाने वाली जानकारियां आ रही हैं। बताया जा रहा है कि वह अलग-अलग जगह पर अलग-अलग कंपनी के नाम पर मशरूम हट के नामपर राशि लेता था। अब तक उसकी पांच कंपनियों की जानकारी सामने आई है। हालांकि धरातल पर एक भी कंपनी नहीं है।

सादे कागज पर ले लिया हस्ताक्षर और अंगूठा

कंपनी के निदेशक मंगलम पर पदाधिकारियों इतने मेहरबान रहे कि जीविका दीदियों से सादे कागज पर दस्तखत और अंगूठा लेकर राशि भेज दी गई।

तीन साल तक काम नहीं कर राशि की ठगी करने की दो प्राथमिकियां होने के बाद भी वह पदाधिकारियों के साथ बैठक करता रहा।

दूसरी ओर कर्ज में डूबीं दीदियां की बेटियों की शादी तक टल गई। इस ठगी में मंगलम को जहां-जहां से मदद मिली वहां अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दीदियां अब सवाल उठा रही हैं। जीविका की पदाधिकारी पर भी कार्रवाई की मांग हो रही है, मगर अब तक जांच तक नहीं बैठी है।

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