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मुजफ्फरपुर में गुरहन घास से बनेगा बायोचार, बंजर हो रही जमीन की लौटेगी उर्वरा शक्ति

Published: Wed, 23 Sep 2026 12:04 PM (IST)

मुजफ्फरपुर के औराई-कटरा क्षेत्र में गुरहन घास का फैलाव करीब पांच हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को बंजर कर रहा है। ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर में जंगली गुरहन घास।

मुजफ्फरपुर में जंगली गुरहन घास।

HighLights

  1. गुरहन घास ने मुजफ्फरपुर में 5000 हेक्टेयर भूमि प्रभावित की।

  2. कृषि विभाग गुरहन घास से बायोचार बनाने की योजना बना रहा।

  3. बायोचार से बंजर जमीन की उर्वरा शक्ति वापस लौटेगी।

अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। औराई-कटरा इलाके में कभी जिन खेतों में फसलें लहलहाती थीं, आज वहां जंगली गुरहन घास (बागमती नदी के तटबंधीय क्षेत्र में उगने वाली एक प्रकार की घास) का घना फैलाव किसानों के लिए बड़ा अभिशाप बन गया है।

करीब 19 किलोमीटर क्षेत्र में फैली यह घास लगभग पांच हजार हेक्टेयर खेती योग्य भूमि को प्रभावित कर चुकी है। अब इसके उन्मूलन के साथ बंजर हो रही जमीन की उर्वरा शक्ति लौटाने की दिशा में भी कृषि विभाग ने पहल शुरू की है।

गुरहन घास से बायोचार तैयार कर उसे प्रभावित खेतों में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। जिला कृषि विभाग गुरहन के फैलाव को नियंत्रित करने के साथ प्रभावित जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाने की कार्रवाई आत्मा (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण) के माध्यम से आगे बढ़ाएगा।

इसके लिए गुरहन घास को विशेष मशीन की मदद से जलाकर बायोचार तैयार करने की योजना है। इस तकनीक और प्रक्रिया की जानकारी लेने के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिकी संस्थान, वर्धा (गुजरात) से संपर्क किया जा रहा है।

जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने बताया कि जिले में गुरहन गंभीर समस्या बन चुकी है। इसके कारण बड़ी मात्रा में खेती योग्य भूमि प्रभावित हुई है और कई स्थानों पर जंगली जानवरों का बसेरा बन गया है। आत्मा के कृषि विज्ञानियों के सहयोग से प्रभावित भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में उपयोगी होगा बायोचार 

आत्मा के सहायक परियोजना निदेशक बिनोद सिंह ने बताया कि बायोचार का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया जाता है। यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है और उर्वरा शक्ति बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है।

योजना के तहत गुरहन को धीरे-धीरे हटाकर उससे तैयार बायोचार का इस्तेमाल खेतों में किया जाएगा। इससे एक ओर गुरहन के फैलाव पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर प्रभावित जमीन की उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास होगा।

बायोचार कार्बनयुक्त पदार्थ है, जिसे घास, फसल अवशेष, लकड़ी या अन्य जैविक सामग्री को कम आक्सीजन की स्थिति में गर्म करके तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया को पायरोलिसिस कहा जाता है।

2007 की बाढ़ के बाद बढ़ा फैलाव 

वर्ष 2007 की बाढ़ के बाद बांध निर्माण के दौरान बाहर से लाई गई मिट्टी के साथ गुरहन घास के बीज भी इलाके में पहुंचे थे। शुरुआत में यह घास महज एक कट्ठा जमीन तक सीमित थी।

गर्मी के मौसम में इसके बीज हवा के साथ आसपास के क्षेत्रों में फैलते गए और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता चला गया। वर्तमान में करीब 19 किलोमीटर क्षेत्र और पांच हजार हेक्टेयर भूमि इसके प्रभाव में है। गुरहन के फैलाव से खेती पहले ही प्रभावित है, वहीं अब फसलों को जंगली जानवरों से भी नुकसान हो रहा है।

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