मुजफ्फरपुर में किसानों को मिलेगी बड़ी राहत, अब गांव-गांव मिलेंगे कृषि यंत्रों के प्रशिक्षित मैकेनिक
किसानों को कृषि यंत्रों की मरम्मत में होने वाली परेशानी दूर करने के लिए मुजफ्फरपुर में एक मजबूत नेटवर्क तैयार ...और पढ़ें

बिहार में मुजफ्फरपुर में कृषि अभियंत्रण कार्यशाला। जागरण
HighLights
कृषि यंत्रों की मरम्मत के लिए गांव-गांव प्रशिक्षित मैकेनिक।
मोबाइल रिपेयरिंग वैन से खेतों तक पहुंचेगी तकनीकी सहायता।
युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर प्रदान होंगे।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर । खेती में ट्रैक्टर, रीपर, थ्रेसर, पावर टिलर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन मशीनों में खराबी आने पर किसानों को मरम्मत के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
कई बार समय पर मैकेनिक नहीं मिलने से बोआई और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्य प्रभावित होते हैं। किसानों की इसी समस्या को दूर करने के लिए अब जिले में कृषि यंत्रों की मरम्मत और तकनीकी सहायता का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की कवायद शुरू की गई है।
इसके तहत गांव-गांव प्रशिक्षित मैकेनिक उपलब्ध कराने की योजना है। कृषि अभियंत्रण कार्यशाला को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव कृषि विभाग को भेजा गया है।
मरम्मत के साथ प्रशिक्षण की भी सुविधा
प्रस्ताव के अनुसार कृषि अभियंत्रण कार्यशाला को केवल कृषि यंत्रों की मरम्मत तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, गुणवत्ता जांच और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता वाले आधुनिक कृषि यंत्र प्रबंधन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे किसानों को एक ही स्थान पर कृषि यंत्रों से जुड़ी कई सुविधाएं मिल सकेंगी।
हर प्रखंड में तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर
कृषि अभियंत्रण उपनिदेशक अजीत कुमार ने बताया कि खेती में आधुनिक मशीनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में किसानों को समय पर तकनीकी सहायता और मरम्मत की सुविधा मिलना जरूरी है। इसके लिए प्रत्येक प्रखंड में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर तैयार करने की योजना है। ये मास्टर ट्रेनर स्थानीय स्तर पर कृषि यंत्रों के संचालन और मरम्मत में किसानों की मदद करेंगे।
निजी मैकेनिकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
जिले में पहले से काम कर रहे निजी मैकेनिकों को भी विशेष प्रशिक्षण देकर अधिकृत सर्विस पार्टनर बनाया जाएगा। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही प्रशिक्षित मैकेनिक मिल सकेंगे। कृषि यंत्रों में खराबी आने पर किसानों को दूर-दराज के शहरों या अधिकृत सर्विस सेंटरों तक मशीन ले जाने की जरूरत कम होगी।
हर माह होगा प्रायोगिक प्रशिक्षण
कृषि यंत्रों के संचालन और मरम्मत से जुड़ा प्रायोगिक प्रशिक्षण हर माह कराने का प्रस्ताव है। इसमें आइटीआइ, पालीटेक्निक और कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को प्रमाणपत्र देने के साथ रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि यंत्रों की मरम्मत के लिए कुशल युवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी।
महंगी मशीन खरीदने पर प्रशिक्षण जरूरी
महंगे कृषि यंत्र खरीदने वाले किसानों को एक से दो दिन का अनिवार्य संचालन और रखरखाव प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इससे किसान मशीन का सही तरीके से उपयोग कर सकेंगे। समय पर सर्विस और रखरखाव की जानकारी मिलने से कृषि यंत्रों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और अचानक खराब होने की समस्या कम होगी।
खेत तक पहुंचेगी मोबाइल रिपेयरिंग वैन
बोआई और कटाई के व्यस्त मौसम में मशीन खराब होने पर किसानों को सबसे अधिक परेशानी होती है। इसे देखते हुए खेतों तक पहुंचकर कृषि यंत्रों की मरम्मत करने के लिए मोबाइल रिपेयरिंग वैन सेवा शुरू करने की योजना तैयार की गई है। इससे जरूरी कृषि कार्य के दौरान मशीन खराब होने पर किसानों को तत्काल तकनीकी सहायता मिल सकेगी।
समय और लागत दोनों की होगी बचत
अधिकारियों के अनुसार योजना लागू होने के बाद कृषि यंत्रों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और मशीनों में खराबी की समस्या कम होगी। किसानों को समय पर मरम्मत की सुविधा मिलने से खेती का काम प्रभावित नहीं होगा। साथ ही मशीनों को दूर ले जाने, निजी मैकेनिकों को खोजने और बार-बार होने वाले खर्च से भी किसानों को राहत मिलेगी।
ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
कृषि यंत्रों की बढ़ती संख्या के साथ प्रशिक्षित मैकेनिकों की मांग भी बढ़ रही है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कृषि यंत्रों के संचालन, मरम्मत और तकनीकी सेवाओं का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
