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मुजफ्फरपुर में नकली डिग्री पर असली नौकरी खेल, तकनीकी सहायक भर्ती में फर्जी पॉलिटेक्निक डिग्रियों का पर्दाफाश

Published: Fri, 30 Oct 2026 07:00 AM (IST)

मुजफ्फरपुर में तकनीकी सहायक भर्ती में फर्जी पॉलिटेक्निक डिग्रियों का खुलासा हुआ है, जिसमें तीन प्रमाणपत्र पूरी तरह नकली पाए ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. तकनीकी सहायक भर्ती में फर्जी पॉलिटेक्निक डिग्रियां मिलीं।

  2. तीन प्रमाणपत्र पूर्णतः फर्जी, दो अपठनीय पाए गए।

  3. फर्जीवाड़े में बड़े रैकेट के शामिल होने की आशंका।

प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर । जिले में पालीटेक्निक (डिप्लोमा) की फर्जी डिग्री का उपयोग तकनीकी सहायकों की बहाली में किया जा रहा है। बिहार राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड के उप परीक्षा नियंत्रक की रिपोर्ट के बाद यह मामला पकड़ में आया है।

अंक के आधार पर इस पद के लिए बहाली हो रही है, इसलिए फर्जी अंकपत्र में विशिष्टता के साथ प्रथम श्रेणी से पास फर्जी अंकपत्र का उपयोग किया गया है।

अब तक तीन प्रमाणपत्र पूर्ण रूप से फर्जी पाए गए हैं। इसके अलावा दो को बोर्ड ने अपठनीय पाया है। इससे भी फर्जी होने की आशंका है। अधिक अंक वाले फर्जी प्रमाणपत्र मिलने से बहाली में रैकेट के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

विदित हो कि पंचायती राज विभाग में तकनीकी सहायकों के पद पर बहाली के लिए पोर्टल पर आवेदन लिए गए। इसमें जिलावार रिक्ति के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन कर उनके प्रमाणपत्र की जांच हो रही है।

इसी क्रम में सभी प्रमाणपत्र संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय को भेजे गए। बिहार राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड की ओर से जिला पंचायती राज पदाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में नौ के प्रमाणपत्र को सही पाया।

वहीं मोनिका कुमारी और बबलू कुमार के अंकपत्र को फर्जी और नकली पाया। इसके अलावा दो अन्य के रोल नंबर के प्रमाणपत्र अपठनीय पाए गए। उप परीक्षा नियंत्रक ने फर्जी प्रमाणपत्र के मामले में जिला पंचायती राज पदाधिकारी को उनके स्तर से कार्रवाई का आग्रह किया है।

वर्ष 2013 और 2021 के हैं फर्जी प्रमाणपत्र

उप परीक्षा नियंत्रक की ओर से जिन प्रमाणपत्रों को फर्जी पाया गया है वे वर्ष 2013 और 2021 में जारी किए गए हैं। वर्ष 2013 में बबलू कुमार के नाम से जारी प्रमाणपत्र राजकीय पालीटेक्निक कालेज गयाजी का है। इसमें विशिष्टता से प्रथम श्रेणी से पास दिखाया गया है। वहीं मोनिका कुमारी का प्रमाणपत्र राजकीय पालीटेक्निक कालेज भागलपुर का है।इसमें भी विशिष्टता से प्रथम श्रेणी से पास दिखाया गया है।

पहले फर्जी पाए गए प्रमाणपत्र पर स्पष्टीकरण

एक और अंकपत्र के फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने अभ्यर्थी से स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें कहा गया है कि जांच में अंकपत्र के फर्जी पाए जाने पर क्यों नहीं विधि सम्मत कार्रवाई की जाए।

पूर्व में भी फर्जी प्रमाणपत्र पर हो चुकी है बहाली, नहीं हो सकी कार्रवाई

जिले के स्वास्थ्य विभाग में फर्जी डिग्री पर एएनएम की बहाली का मामला सामने आया था। इसमें बड़ी संख्या में फर्जी डिग्री की आशंका जताई गई थी। यह बात भी सामने आई थी कि एक ही प्रमाणपत्र पर रोल नंबर और नाम बदल-बदलकर नौकरी पा ली गई। मामले की जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी।

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