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Padma Shri: मुजफ्फरपुर के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को मरणोपरांत मिला पद्मश्री सम्मान, परिवार हुआ भावुक

Published: Tue, 26 May 2026 06:23 AM (IST)

मुजफ्फरपुर के बदरा प्रखंड के दिवंगत पूर्व कुलपति डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। उनके पुत्र ...और पढ़ें

डॉ. गोपालजी त्रिवेदी। फाइल फोटो

डॉ. गोपालजी त्रिवेदी। फाइल फोटो

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संवाद सहयोगी, बंदरा (मुजफ्फरपुर)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बदरा प्रखंड क्षेत्र के लिए सोमवार का दिन गौरव और भावुकता से भरा रहा। शिक्षा व कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले दिवंगत पूर्व कुलपति डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को नई दिल्ली में मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया है।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनके पुत्र डॉ. रमण त्रिवेदी ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस खबर से क्षेत्र में खुशी का माहौल है, वहीं परिवार के लोगों की आंखें भी नम हैं।

मतलुपुर मंदिर न्यास समिति के सचिव बैद्यनाथ पाठक ने बताया कि यदि आज डॉ. गोपालजी त्रिवेदी जीवित रहते तो यह पल पूरे परिवार और क्षेत्र के लिए किसी पर्व से कम नहीं होता।

सादगीपूर्ण था जीवन  

वहीं, उनके पुत्र ने फोन पर कहा 'पिताजी हमेशा समाज और शिक्षा के लिए समर्पित रहे। उन्हें सम्मान मिलने से गर्व तो है, लेकिन यह भी दुख है कि आज वे इस ऐतिहासिक पल में होते और स्वयं अपना सम्मान पाते तो कुछ और बात होती'।

उन्होंने कहा कि पिताजी गांव में रहकर बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। उन्हें कभी पुरस्कार या सम्मान की लालसा नहीं रही। वे हमेशा कहते थे कि समाज के लिए किया गया कार्य ही सबसे बड़ा सम्मान होता है। आज देश का इतना बड़ा सम्मान मिलना उनके जीवन के संघर्ष और योगदान की पहचान है।

पूरे क्षेत्र में गर्व का माहौल

परिवार की महिलाओं ने भी भावुक होकर कहा कि घर में खुशी और गम दोनों का माहौल है। एक ओर पद्मश्री मिलने का गर्व है, तो दूसरी ओर उनकी कमी लगातार महसूस हो रही है। अगर वे रहते तो पूरे गांव और इलाके में अलग ही उत्साह होता।

ग्रामीण व शुभचिंतकों में रामकुमार त्रिवेदी, ललन त्रिवेदी, श्याम किशोर आदि ने भी इसे पूरे क्षेत्र का सम्मान बताया है। इनलोगों का कहना है कि डॉ. गोपालजी त्रिवेदी ने शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के जरिए समाज में जो योगदान दिया, उसी का परिणाम है कि उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया है। इस सम्मान ने क्षेत्र की अलग पहचान और शान बढ़ी है।

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