नगर निगम में हाल में शामिल क्षेत्रों के विकास पर खर्च होगी 40 प्रतिशत अधिक राशि
Urban Development Budget: मुजफ्फरपुर नगर निगम बोर्ड की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 2007 और 2012 में विस्तारित ग्रामीण ...और पढ़ें

Urban Development Budget: नगर निगम की बैठक में शामिल अधिकारी। फोटो: जागरण
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Municipal Corporation: नगर निगम क्षेत्र में वर्ष 2007 और 2012 के दौरान ग्रामीण क्षेत्र से कटकर शहर में शामिल हुए इलाकों के विकास पर अब 40 प्रतिशत अधिक राशि खर्च की जाएगी।
इन क्षेत्रों में लंबे समय से अपेक्षित विकास नहीं होने को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इसके तहत करीब एक दर्जन वार्डों में योजनाओं का चयन कर उनका एस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
शनिवार को नगर भवन सभागार में महापौर निर्मला देवी की अध्यक्षता में नगर निगम बोर्ड की 17वीं बैठक आयोजित की गई। विधानसभा चुनाव के बाद हुई इस पहली बैठक में नगर विधायक रंजन कुमार और कांटी विधायक अजीत कुमार पहली बार शामिल हुए। वहीं नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह, उप नगर आयुक्त अमित कुमार एवं श्वरा, कार्यपालक अभियंता और दोनों नगर प्रबंधकों के लिए भी यह पहली बोर्ड बैठक थी।
बैठक के दौरान पार्षदों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने में कई अधिकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मानव बल उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। नगर विधायक रंजन कुमार ने पूछा कि जिस एजेंसी को सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है, उसकी सेवा नगर निगम कैसे ले रहा है। इस पर नगर आयुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मानव बल की तैनाती पर नाराजगी
पार्षदों ने शिकायत की कि कई कर्मचारी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद कार्यस्थल से गायब रहते हैं। चर्चा में यह बात सामने आई कि नगर निगम के सौ से अधिक मानव बल प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी, एसडीओ सहित अन्य अधिकारियों के आवास पर तैनात हैं। इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए जांच की मांग की गई। महापौर ने जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मानव बल उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त होने से पहले नई गाइडलाइन के अनुसार नई एजेंसी का चयन किया जाएगा।
बरसात से पहले नालों की उड़ाही का निर्देश
बैठक में बरसात से पहले शहर के सभी नालों की सफाई और उड़ाही कराने का निर्णय लिया गया। साथ ही बुडको, स्मार्ट सिटी कंपनी, रेलवे और आरसीडी को नाला निर्माण का कार्य शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया, ताकि जलजमाव की समस्या से बचा जा सके। बुडको के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति और स्मार्ट सिटी प्रतिनिधि की लापरवाही पर नाराजगी भी जताई गई।
आईओसीएल के जेई को बैठक से किया गया बाहर
बैठक में गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान जलापूर्ति पाइपलाइन क्षतिग्रस्त करने और सड़कों की मरम्मत नहीं होने पर पार्षदों ने सवाल उठाए। इस पर आईओसीएल के कनीय अभियंता द्वारा “तोड़-फोड़ हमारा काम है” कहने पर पार्षद भड़क गए। हंगामे के बाद उन्हें बैठक से बाहर कर दिया गया।
बैठक में लिए गए अन्य निर्णय
- मार्गदर्शन के लिए भेजे गए पत्रों पर जवाब नहीं मिलने पर रिमाइंडर भेजना
- 15 लाख रुपये से कम की आवश्यक योजनाओं का एक सप्ताह में एस्टीमेट तैयार करना
- निगम में होमगार्ड व भूतपूर्व सैनिकों की सेवा लेने की प्रक्रिया शुरू करना
- खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के लिए विशेष टीम का गठन
- श्रावणी मेला में खरीदी गई स्ट्रीट लाइट की गुणवत्ता जांच
- एन-कैप योजनाओं की जांच के लिए कमेटी गठन
नगर निगम ने इन निर्णयों के माध्यम से शहर के समग्र विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने का दावा किया है।
