मुजफ्फरपुर MIT में 3 महीने में रैगिंग के 5 मामले, अब कैंपस के अंदर ही जूनियरों को बना रहे शिकार
Bihar Engineering College Ragging: मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में पिछले तीन महीनों में रैगिंग के 4-5 मामले सामने आए हैं, जो अब कैंपस के भीतर ही हो रहे हैं।

अब सीनियर छात्रों ने रैगिंग के लिए परिसर के अंदर के सुनसान हिस्सों को चुनना शुरू कर दिया है।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। MIT Muzaffarpur Ragging News: मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में कैंपस के भीतर ही छात्रों के साथ रैगिंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
अब सीनियर छात्र संस्थान के बाहर किसी कैफे या दुकान के बजाय कैंपस के खेल मैदान या अन्य स्थानों पर ही जूनियरों को निशाना बना रहे हैं। पिछले दो से तीन महीनों के दौरान कैंपस के अंदर रैगिंग की चार से पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
कैंपस में बदली रणनीति
पहले रैगिंग की घटनाएं अक्सर कॉलेज परिसर के बाहर चाय की दुकानों, कैफे या मुख्य प्रवेश द्वार पर देखने को मिलती थीं।
एंटी-रैगिंग टीम की सतर्कता के कारण पहले परिसर के भीतर ऐसी गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगी हुई थी। लेकिन अब सीनियर छात्रों ने रैगिंग के लिए परिसर के अंदर के सुनसान हिस्सों को चुनना शुरू कर दिया है।
पहचान छिपाने की मजबूरी
हाल ही में सामने आए मामलों में पीड़ित जूनियर छात्रों ने कॉलेज प्रशासन को लिखित शिकायत तो दर्ज कराई है। हालांकि, डर या अन्य कारणों से वे आरोपी सीनियर छात्रों का नाम बताने या उनकी पहचान करने में असमर्थ रहते हैं।
इस कारण अनुशासन समिति की बैठकों में सुनवाई के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
कॉलेज प्रशासन का रुख
अनुशासन समिति के सदस्यों का कहना है कि जागरूकता अभियानों के कारण छात्र अब शिकायत दर्ज कराने आगे आ रहे हैं। वहीं AICTE से शिकायतें मिलने के बाद भी जांच प्रक्रिया के दौरान आरोपी छात्रों की सटीक पहचान नहीं हो पा रही है।
MIT के प्राचार्य डॉ. एमके झा ने स्पष्ट किया है कि रैगिंग में संलिप्त पाए जाने वाले दोषियों पर आर्थिक दंड से लेकर ब्लैक डॉट तक की सख्त कार्रवाई की जाती है।
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