मुजफ्फरपुर। स्नातक में नामांकन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन मंगलवार से शुरू तो हुआ, लेकिन पहले ही दिन विद्यार्थियों को भारी निराशा हाथ लगी। मुजफ्फरपुर जिले में विद्यार्थियों को सहूलियत और उनकी मदद के लिए आरडीएस व एमडीडीएम कॉलेज में दो हेल्प सेंटर खोले गए हैं। हर सेंटर पर एक-एक टेक्निकल स्टाफ भी बिहार बोर्ड से बहाल हैं मगर ये छात्रों के काम नहीं आ सके। एमडीडीएम में थोड़ी-बहुत जानकारियां मिल भी पाई तो आरडीएस में टेक्नीकल स्टाफ को विद्यार्थी ढूंढ़ते रह गए। वैशाली से आए नवीन कुमार को अपनी भतीजी के नामांकन के लिए लिए रजिस्ट्रेशन करना था, मगर पूरे दिन इंतजार के बाद वे बैरंग लौट गए। उधर, एमडीडीएम की प्राचार्य डॉ. ममता रानी ने बताया कि उनके यहां आज रजिस्ट्रेशन तो नहीं हुआ मगर विद्यार्थियों को उसका प्रॉसेस बताया गया। उनके सवालों के जवाब दिए गए। बावजूद रजिस्ट्रेशन को इच्छुक छात्र-छात्राएं जानकारी के लिए कॉलेजों का चक्कर लगाते रहे। इस साल से सेंट्रलाइज एडमिशन की व्यवस्था हुई है और इसकी मॉनीट¨रग बिहार विद्यालय शिक्षा समिति यानी बीएसईबी के हाथों में है। रजिस्ट्रेशन का दौर शुरू होने के बाद भी विद्यार्थियों के साथ कई कॉलेजों के प्राचार्य तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व एडमिशन के प्रॉसेस को लेकर ऊहापोह में हैं। दरअसल, प्राचार्यो को कोई ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है इस कारण उन्हें भी तौर-तरीके की जानकारी नहीं है। जिले से इंटरमीडिएट तीनों संकायों-साइंस, आ‌र्ट्स व कॉमर्स मिलाकर 40328 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिनमें 23836 विद्यार्थी पास हुए हैं। मनपसंद कॉलेजों में आवेदन का विकल्प

बीएसईबी के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन फैसिलिटेशन सिस्टम फॉर स्टूडेंट (ओएफएसएस) सॉफ्टवेयर के माध्यम से नामांकन होना है। नई व्यवस्था लागू करने के पीछे अधिकारियों का तर्क है कि इससे विद्यार्थियों को एडमिशन के लिए कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रवेश प्रक्रिया पहले पारदर्शी नहीं थी जो मेधावी छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आए लोगों के लिए अनुचित थी। वहीं अब विद्यार्थी अलग-अलग कॉलेजों में एक ही जगह से आवेदन करने में सक्षम होंगे।

Posted By: Jagran

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