मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के सिंडिकेट की बैठक में सदस्यों ने नीतिगत निर्णयों पर सवाल उठाए। इस पर हंगामा होने लगा। इसी बीच कॉलेजों की संबद्धता के प्रस्तावों को सशर्त मंजूरी मिली। सदस्यों ने कुलपति के नीतिगत फैसले लेने पर आपत्ति उठाई। खास तौर से प्राचार्यो को डबल चार्ज व कर्मठ प्राचार्य के ट्रांसफर का मामला रहा। यही नहीं बैठक के दौरान छात्र जद यू ने भी कार्यवाही बाधित की।

सिंडिकेट की बैठक पांच घंटे तक चली। इस दौरान भारी हंगामे के बीच कॉलेजों में सत्र 2020 के विभिन्न विषयों में नामांकन के लिए संबद्धता दी गई। लेकिन, शर्त भी रखी गई। जिन 17 कॉलेजों को पूर्व से संबद्धता है, उन्हें स्थायी सबंद्धता देने को कहा गया। नए प्रस्तावित कॉलेजों को संबद्धता देने के पूर्व सरकार के दिशा निर्देशों के पालन पर जोर दिया गया। कहा कि नियम विरुद्ध किसी कॉलेज को संबद्धता नहीं दी जाए। शर्त यह भी थी कि 31 जनवरी को होने वाली सीनेट की बैठक से पूर्व सिंडिकेट सदस्यों को बताना होगा कि किन कॉलेजों को संबद्धता कितनी अवधि के लिए दी गई है।

अतिथि शिक्षकों की कुछ विषयों में बहाली का मामला भी रुका है। पर सबसे महत्वपूर्ण बीपीएससी से चयनित कार्यरत 100 शिक्षकों का कंर्फमेशन का मामला रहा। उसे यह कहकर रोका गया कि विधिक कमेटी से मंजूरी दिलाई जाए।

बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद छात्रजद यू कार्यकर्ता बैठक में घुस गए। वहां सात सूत्रीय मांगें रखी। सिंडिकेट सदस्य हरेंद्र कुमार ने कुलपति को अलग से समय देने को कहा। ताकि, सिंडिकेट बैठक की कार्यवाही बाधित न हो सके।

कुलपति प्रो. आरके मंडल व रजिस्ट्रार कर्नल अजय कुमार राय के साथ अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। सदस्यों में डॉ. हरेंद्र कुमार, रेवती रमण, धनंजय सिंह नरेंद्र कुमार ने बैठक में अपनी बातें रखीं।

बिहार छात्र छात्र जद यू के प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तम पांडेय व विवि अध्यक्ष रंजीतराज गुड्डृ से कुलपति ने शाम 5 बजे वार्ता की। सात सूत्री मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

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